मौजूदा समय में उत्तराखंड में कितने गरीब हैं, यह संख्या जल्द सामने आएगी। राज्य में गरीबों की गिनती के लिए इसी हफ्ते से सर्वेक्षण होने जा रहा है। अर्थ एवं संख्या निदेशालय ने सर्वे की तैयारी कर ली है। राज्य की योजनाओं के लिहाज से इस सर्वेक्षण का खास महत्व माना जा रहा है।
निदेशालय के संयुक्त निदेशक डॉ. मनोज कुमार पंत के मुताबिक, अब तक हुए गरीबी के तमाम सर्वे से यह अलग होगा। संयुक्त राष्ट्र विकास का कार्यक्रम (यूएनडीपी) के मानकों के आधार पर यह सर्वे होगा। सर्वेक्षण में गरीबी की रेखा तय करने के लिए ग्रामीण गरीबों के लिए आहार मानक 2400 कैलोरी व शहरी गरीबों के लिए 2100 कैलोरी प्रतिदिन रखा जाएगा।
अभी तक गरीबी के सर्वे केवल आहार मानकों पर हुए हैं, लेकिन इस सर्वे में उपभोग के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवन निर्वाह, पानी, बिजली और शौचालय की उपलब्धता भी मानकों की श्रेणी में होंगे। बता दें कि वर्ष 2011 के बाद उत्तराखंड को लेकर कोई प्रमाणिक सर्वे नहीं हुआ है। करीब नौ वर्षों दौरान जो आंकड़े सामने आए, उन्हें लेकर भी भ्रम की स्थिति रही। अलग-अलग सर्वेक्षण व आंकलनों में प्रदेश में गरीबी के अलग-अलग आंकड़े सामने आए।