विधानसभा के बजट सत्र को छोड़ के CM पुष्कर सिंह धामी बिना घोषित कार्यक्रम के आज अचानक दिल्ली पहुँच गए.उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव प्रत्याशियों के नामों पर अंतिम फैसले से पहले High Command अहम राय ले रहा है.ये तय है कि पुष्कर Camp के मजबूत-ऊर्जावान-भरोसेमंद चेहरों को ही BJP प्रत्याशी बना सकती है.Sitting-Getting Formula इस बार लागू होने के आसार बहुत मद्धिम है.PSD के लुटियंस दिल्ली पहुँचते ही टिकट के दावेदारों की धड़कन और सियासी पारा खूब चढ़ गया है.इससे इनकार कतई नहीं है कि खटीमा में विधानसभा के आम चुनाव में पीठ में खंजर घोंपने वालों की दावेदारी को हवा में उड़ा दिया जाएगा या फिर मीलों नीचे दफ़न कर दिए जा सकते हैं.
CM Pushkar Singh Dhami-राज्य भर में हो रहे रोड शो में गजब की भीड़ उमड़ रही:लोकसभा टिकट बंटवारे में अहम भूमिका निभाएँगे
लोकसभा के ये चुनाव मौका है मुख्यमंत्री पुष्कर के लिए खुद का कद और बढ़ाने का.उत्तराखंड BJP के नए महामानव के तौर पर खुद को स्थापित करने का.केन्द्रीय नेतृत्व की दूसरी पांत के अग्रणी चेहरों में शामिल होने का.पुष्कर का जलवा और असर है कि उत्तराखंड में BJP अन्य राज्यों के मुकाबले बेहद शक्तिशाली है.मुख्य विपक्षी दल Congress में इसके चलते यहाँ जोश और उत्साह बेहद ठंडा है.उसके पास मजबूत प्रत्याशियों का अभाव दिख रहा है.ऎसी खबर है कि कई बड़े दिग्गज BJP के दरवाजा खुले तो कुछ छोटी-बड़ी शर्तों के साथ घुसने के लिए बेकरार हैं.वे PSD से किसी तरह संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं.
मुख्यमंत्री पुष्कर ने तमाम बाधाओं से पार पाते हुए और नए-नए क्रांतिकारी फैसलों से देश-विदेश तक में सुर्खियाँ लूटी हैं.नक़ल विरोधी कानून (प्रतियोगी इम्तिहान) और UCC (समान नागरिक संहिता) से वह छाए हुए हैं.प्रतियोगी इम्तिहान) और UCC (समान नागरिक संहिता) से वह छाए हुए हैं.नाप-तौल के ठोस बोलने और किसी भी मसले पर जुबान फिसलने के चलते न फंसने वाले CM के तौर पर वह छवि कायम कर चुके हैं.PM नरेन्द्र मोदी और HM अमित शाह उन पर इसके चलते ही बेहद यकीन करते हैं.लोकसभा चुनाव प्रत्याशियों का पैनल पार्टी ने कल दिल्ली भेज दिया लेकिन ये तय है कि नामों पर अंतिम फैसला पुष्कर की राय से ही होगा.
लोकसभा चुनावों की घोषणा के लिए अब पखवाड़े से भी कम का अरसा है.इसको देखते हुए BJP फटाफट अपने प्रत्याशियों पर फैसला कर रही है.5 सीटों के लिए उसने 55 दावेदारों के नामों का पैनल बना दिया.इस पर आज दिल्ली में CM और High Command में मंथन होना है.हार-जीत और अन्य किसी भी किस्म के प्रदर्शन के लिए सिर्फ और सिर्फ CM ही जिम्मेदार होते हैं.ऐसे में देवभूमि में पुष्कर ही टिकटों के मामले में परमेश्वर कहे जा सकते हैं.PM-HM ने हाल के महीनों में युवा और उत्साही चेहरों पर यकीन दिखाया है.MP-राजस्थान में CM इसकी मिसाल हैं.खुद पुष्कर और UP के CM आदित्यनाथ बेहद युवा हैं.टिकटों के बंटवारे में भी युवा काबिल और भरोसेमंद-मेहनती चेहरों को तरजीह मिल सकती है.
ये संभव है कि मुख्यमंत्री पाँचों लोकसभा सीटों पर बुढ़ाते-ढलक रहे Senior किस्म के चेहरों पर युवा और अपने विश्वासपात्र को तवज्जो दें.उनको तो वह ख़ास तौर पर 440 वोल्ट का झटका देंगे, जिनके दामन पर खटीमा की जंग में मीरा जाफरी-जयचंदी-विभिषनी करने का काला धब्बा लगा है.PSD के पास उन सभी चेहरों का Record है, जिन्होंने उनको हराने के लिए किस-किस तरह से कैसे-कैसे जोर लगाए थे.अपने मंत्रिमंडल गठन में भले उन्होंने हाई कमान के सामने कोई इच्छा जाहिर नहीं की लेकिन लोकसभा चुनाव आने तक देवभूमि से गंगा-यमुना और सरयू का पानी बहुत बह चुका है.PSD अब उस हैसियत में हैं कि लोकसभा टिकट के बंटवारे में आला कमान को मजबूर कर दगाबाज विरोधियों का पत्ता साफ़ कर दिया जाए.
पुष्कर को मोदी-शाह का लाडला माना जाता है.आज की तवारीख में उनके लिए सियासी विरोधियों की गिल्ली उड़ा के क्लीन बोल्ड करना बाएँ हाथ का खेल है.उनके विरोधी रहे और खटीमा में दगाबाजी पर उतरे चेहरे भी इस बार तमाम सीटों से टिकट के लिए हाथ जोड़े खड़े हैं.कोई करामात या फिर पुष्कर की दया-उनके अपने दम पर भी जीत जाने की गारंटी ही उनको टिकट दिला सकती है.प्रत्याशियों पर फैसला होने में अब अधिक वक्त लगता दिख नहीं रहा है.पुष्कर के दिल्ली से लौटने तक अंदरखाने की तस्वीर साफ़ हो चुकी होगी.
अलग-अलग सीटों की बात की जाए तो पौड़ी और टिहरी में टिकटों की मारामारी सबसे अधिक है.पौड़ी से पुष्कर सरकार के मंत्री सतपाल महाराज ने दावा वापिस ले लिया है.इसके बावजूद 2 पूर्व CM त्रिवेंद्र सिंह रावत और मौजूदा MP तीरथ सिंह रावत के साथ ही स्पीकर ऋतु खंडूड़ी और Upper House MP अनिल बलूनी-युवा तथा BJP महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महासचिव दीप्ती रावत की मजबूत दावेदारी ने पौड़ी का सियासी शेयर बाजार को जम कर गर्म किया हुआ है.पार्टी हाई कमान अगर मौजूदा हालात के मद्देनजर युवा और भविष्य की तरफ देखता है तो दीप्त्ती की लॉटरी लग सकती है.बलूनी को पूर्वी दिल्ली सीट का भी मजबूत दावेदार माना जाता है.वहां उत्तराखंडी और ब्राहमण वोटर बेशुमार हैं.दो में से एक सीट चुनने का मौक़ा मिले तो वह दिल्ली ही कूच कर सकते हैं.
दोनों TSR के साथ ही राज्य में मंत्री डॉ धन सिंह रावत भी इस सीट पर दावेदारों में हैं.ऐसा लगता नहीं कि वह खुद की दावेदारी को ले के बहुत गंभीर हैं.इसकी एक वजह उनका सरकार में मजबूत हालात में होना है.कम उम्र भी अभी उनके हक़ में हैं.नैनीताल सीट पर भी जम के मारामारी हो रही.यह मुख्यमंत्री का घरेलू संसदीय क्षेत्र भी है.यहाँ मौजूदा MP और केंद्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट को इस बार अरविन्द पांडे-राजेश शुक्ला से कायदे की कड़ी टक्कर टिकट के लिए मिल रही है.नाम बलराज पासी का भी लिया जा रहा.उनके बारे में ये भी उछल के बात सामने आ रही कि वह सटी हुई UP की पीलीभीत सीट पर भी फोकस किए हुए हैं.शुक्ला को पुष्कर के करीबियों में शुमार किया जाता है.
ऎसा ही दर्जा हरिद्वार सीट पर स्वामी यतीश्वरानन्द को हासिल है.वह भी मुख्यमंत्री के पुराने और करीबियों में हैं.यहाँ मौजूदा MP और पूर्व CM डॉ रमेश पोखरियाल निशंक के रहते उनसे टिकट छीन के लाना बिना मुख्यमंत्री की मदद के तकरीबन ना-मुमकिन होगा.दावेदार और भी कई हैं लेकिन त्रिवेन्द्र (पौड़ी के साथ ही यहाँ से भी दावा) और मदन कौशिक को भी गंभीर दावेदार कहा जा रहा है.ये वह सीट है जहाँ मुस्लिम और दलित वोटर भर-भर के हैं.बीजेपी यहाँ बेहद सोच-समझ के और मुख्यमंत्री की तरफ से चुनाव में बढ़िया प्रदर्शन की गारंटी मिलने के बाद ही प्रत्याशी तय करेगी.
टिहरी में इस बार महारानी माला राज्यलक्ष्मी के टिकट पर ख़तरा मंडराता नजर आ रहा.इसकी वजह पार्टी में भीतर ही भीतर उनके विरोधियों का सक्रिय होना है.इस सीट पर महारानी का विकल्प बनने के लिए खड़े तो कई हो गए लेकिन वे महारानी जैसा कलेवर चुनाव में दे पाएंगे, इसमें शक है.सरकार में मंत्री सुबोध उनियाल-ज्योति गैरोला-मुन्ना सिंह चौहान बहुत कड़े प्रतियोगी माला राज्यलक्ष्मी की टिकट से छुट्टी करने लायक दिख नहीं रहे हैं.महारानी की संसदीय सीट पर निष्क्रियता ही उनके खिलाफ असल मुद्दा है.
युवा चेहरों को मानक बनाया जाता है तो मंत्री गणेश जोशी की बेटी नेहा जोशी और मनवीर सिंह चौहान को भी टिकट की लड़ाई में गभीरता से लेना होगा.अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ में सिर्फ मौजूदा MP अजय टम्टा और सरकार में मंत्री रेखा आर्य को ही मजबूत दावेदार माना जा रहा है.टम्टा को उनका लोक बर्ताव मजबूत बनाता है.रेखा को उसकी सक्रियता ताकत देती है.सब गणित देखा-पढ़ा जाए तो एक बात फिर भी साफ़ है.जो भी जीतेगा मोदी और पुष्कर के बूते ही.अपने दम पर लोकसभा पहुँचने का जिगर बहुत मामूली लोगों में है.
दिल्ली से कल CM पुष्कर लौट के आएँगे तो उनके हाथ में प्रत्याशियों के नामों की गोपनीय अंतिम सूची भी हो सकती है.इस सूची में अपना नाम देखने के लिए ही पार्टी के तमाम दावेदार छटपटाए दिख रहे हैं.ये तो साफ़ हो चुका है कि टिकट की गारंटी किसी भी MP को नहीं दी गई है.एक और अहम पहलू ये है कि इस चुनाव पर ही TSR-1-2 के साथ ही अजय भट्ट-निशंक-कौशिक का सियासी भविष्य टिका हुआ है.टिकट न मिलने पर उनके सियासी जिंदगी की रफ़्तार को तगड़ा ब्रेक लग जाना तय है.