उत्तराखंड के Former Chief Secretary राकेश शर्मा के MLA पुत्र चैतन्य शर्मा राज्यसभा चुनाव में अपनी पार्टी Congress के खिलाफ Cross Voting में शरीक हो के हिमाचल प्रदेश और देश भर की सियासत में सुर्खियाँ बटोर रहे हैं.माना जा रहा है कि उनका कांग्रेस छोड़ के विपक्ष में मौजूद BJP में जाना तय है.वह गगरेट से विधायक हैं.
Former Chief Secretary Rakesh Sharma
कांग्रेस के 6 विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में BJP को वोट दिया.इससे उनके प्रत्याशी अभिषेक मनु सिंघवी हार गए.इसके बाद हिमाचल की राजनीति में तूफ़ान आया हुआ है.देश भर में हंगामा छिड़ा हुआ है.ये साफ़ है कि चैतन्य शर्मा अन्य बागी कांग्रेस विधायकों के साथ कमल के फूल पर सवार होंगे.
ये बहस भी छिड़ी है कि क्या सभी बागियों की विधायकी जा सकती है!इसमें जानकारों के मुताबिक राज्यसभा चुनाव का सञ्चालन चुनाव आयोग के हाथों में होने के चलते किसी भी बागी की विधानसभा सदस्यता नहीं जाएगी.अलबत्ता,कांग्रेस वे नहीं छोड़ सकेंगे.ऐसा किया तो उनकी विधायकी ख़त्म हो जाएगी.
चैतन्य भले कांग्रेस में हैं लेकिन हकीकत ये है कि वह BJP से ही विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे.उनको वहां से टिकट नहीं मिला तो वह ऐन चुनाव के वक्त कांग्रेस में चले गए.वहीँ से टिकट हासिल कर वह भारी वोटों से BJP प्रत्याशी को शिकस्त दे के विधानसभा पहुंचे थे.
चैतन्य के पिता राकेश शर्मा एक दशक पहले उत्तराखंड के मुख्य सचिव और CM (तब हरीश रावत) के मुख्य प्रधान सचिव भी कुछ वक्त के लिए रहे थे.वह अपनी तेज तर्रार कार्यशैली और Result देने वाली अदा के चलते खूब लोकप्रिय और विवादित भी रहे थे.उन्होंने उत्तराखंड में उधम सिंह नगर की किच्छा सीट से विधानसभा चुनाव में तकदीर आजमाने की कोशिश की थी.
उसी सीट पर हरीश रावत के उतरने के आसार देख उन्होंने फिर चुनाव लड़ने का ईरादा ही त्याग दिया था.बाद में वह अपने गृह राज्य हिमाचल चले गए और फिर बेटे को सियासत में उतार दिया.चैतन्य सिर्फ 27 साल की अवस्था में ही विधानसभा पहुँच गए थे.अब हिमाचल प्रदेश में Cross Voting से वह पिता की तरह ही देश भर की मीडिया में छाए हुए हैं.
चैतन्य का BJP में जाना या फिर कांग्रेस से बर्खास्त हो के BJP में गए बगैर उसको समर्थन देना वक्त की बात भर समझी जा रही.पार्टी उनको बर्खास्त कर देती है तो उनकी विधायकी बनी रहेगी.खुद पार्टी छोड़ने पर विधायकी चली जाएगी.चैतन्य विधानसभा सदन में BJP विधायकों के साथ ही बैठे.