बलिया जिले में गंगा नदी का जलस्तर नीचे खिसकते ही कटान शुरू हो गया। इससे गोपालपुर गांव स्थित सैकड़ों वर्ष पुराने कन्हई ब्रम्ह बाबा स्थान पर नीम और बरगद के विशाल पेड़ गंगा की गोद में समाहित हो गए। वहीं कटान का सिलसिला शनिवार को भी जारी रहा, जिससे दहशत का माहौल है। माना जा रहा है कि गंगा की लहरें किसी भी समय कन्हई ब्रह्म बाबा के स्थान को अपने चपेट में ले सकतीं हैं।
कटान की सूचना मिलते ही बाढ़ विभाग के ठेकेदारों ने प्लास्टिक की बोरी में मिट्टी भरकर गंगा नदी के किनारे डालने का काम शुरू कर दिया। इसके पहले हरे पेड़ों की टहनियां एवं बम्बूक्रेट विधि से कटान रोकने का प्रयास भी किया गया। हालांकि कुछ खास सफलता नहीं मिली।
स्नान करने वालों को घाट पर जाने से रोका
कार्तिक महीना होने से गोपालपुर कन्हाई ब्रह्म बाबा स्थान पर ही क्षेत्र के दयाछपरा, दलपतपुर, चकिया, नवका गांव आदि गांवों के लोग गंगा स्नान के लिए प्रतिदिन बजे भोर में पहुंचते हैं। शुक्रवार रात गंगा में कटान शुरू हुआ। शनिवार की भोर में भी महिलाएं व पुरुष गंगा स्नान के लिए गोपालपुर श्री कन्हई ब्रह्म स्थान पर पहुंचे तो वहां चल रहे अखंड रामचरितमानस पाठ करने वालों ने उन्हें रोका क्योंकि घाट पर जाने से कटान की चपेट में आने का खतरा था।