धामी सरकार के सामने यूपी से विरासत में मिले सरकारी सिस्टम की पेचीदगियों को दूर करने की सबसे बड़ी चुनौती है। सत्ता की कमान हाथों में आने के बाद से धामी सरलीकरण, समाधान और निस्तारण के मंत्र पर जोर दे रहे हैं। सरकारी तंत्र पर इस मंत्र को फूंकने की जिम्मेदारी उन्होंने मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु को सौंपी है।
पिछले एक हफ्ते में मुख्य सचिव ने शासन में बैठे उच्चाधिकारियों के लिए जो दो अहम आदेश जारी किए, उनका संबंध मुख्यमंत्री के मंत्र से ही है। राज्य गठन के बाद से ही सरकारी तंत्र को लेकर तीन प्रमुख शिकायतें रही हैं। पहली शिकायत यह है कि सचिवालय में आकर फाइलें कहीं गुम या ताले में बंद हो जाती हैं और राजनेताओं या करीबियों की सिफारिश की चाभी से कुछेक फाइलों का ताला खुलता है।
दूसरी शिकायत, खुद फील्ड में तैनात सरकारी कारिंदों की ओर से है कि वे शासन को जो काम की फाइलें भेजते हैं, उनमें इतनी आपत्तियां लगा दी जाती हैं कि योजना या प्रस्ताव पर समय पर काम शुरू करना मुश्किल हो जाता है। जिसका नतीजा यह होता है कि उसकी लागत बढ़ जाती है। एक बार में आपत्तियां दूर नहीं हो पाती।
तीसरी बड़ी शिकायत यह है कि तहसील हो या कलक्टर का दफ्तर या सचिवालय हर जगह हर समय अफसर बैठकों में मशगूल रहते हैं। फरियाद लेकर अफसरों के पास आने वाली जनता को बैरंग लौटना पड़ता है। साथ ही यह शिकायत भी आम रही है कि कतिपय सरकारी कर्मचारी समय पर दफ्तर नहीं आते या शाम को जल्दी चले जाते हैं। इन सभी शिकायतों का एक-एक कर समाधान तलाशने की कोशिश हो रही है।