अमेरिका को दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र के तौर पर जाना जाता रहा है। यहां सत्ता में शक्तियों के बंटवारे के नियम भी काफी स्पष्ट रहे हैं। खासकर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की ताकतों और जिम्मेदारियों को लेकर। 2020 में चुनावी नतीजे आने के बाद जहां डेमोक्रेट पार्टी की ओर से जो बाइडन राष्ट्रपति बने तो वहीं उनके द्वारा नामित कमला हैरिस ने उपराष्ट्रपति का पद संभाला। बाइडन का यह फैसला उनकी जीत के पीछे काफी अहम माना जाता रहा है, क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ अलग-अलग समुदायों खासकर अश्वेतों-महिलाओं के वोट खींचने में हैरिस का चेहरा काफी प्रभावी रहा। हालांकि, सरकार बनने के महज एक साल में ही दोनों के बीच दरारों की खबरें सामने आने लगी हैं। अब एक किताब में दावा किया गया है कि हैरिस और बाइडन के बीच शक्तियों को लेकर तनाव इतना बढ़ गया था कि उपराष्ट्रपति की तरफ से राष्ट्रपति को चेतावनी तक दे दी गई थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के शासन के पहले साल और 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों को लेकर लिखी गई आने वाली किताब ‘दिस विल नॉट पास: ट्रंप, बाइडन एंड द बैटल फॉर अमेरिकन डेमोक्रेसी’ में देश के शीर्ष स्तर के नेताओं के बीच छिड़े विवादों को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। इस किताब के लेखक द न्यूयॉर्क टाइम्स के दो पत्रकारों- एलेक्जेंडर बर्न्स और जोनाथन मार्टिन हैं।
कौन, किससे नाराज; क्या रहे बाइडन और हैरिस के बीच विवाद?
इस किताब में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के बीच उभरे कई विवादों का ब्योरा दिया गया है। हालांकि, सबसे चौंकाने वाला खुलासा बाइडन की ओर से हैरिस की शक्तियों को सीमित करने का है। बताया गया है कि कमला हैरिस ने एक समय बाइडन को चेतावनी दी थी कि वे उन्हें सिर्फ नस्लीय और महिलाओं के मामलों तक सीमित करने की कोशिश न करें। कमला हैरिस ने अपनी चिंताएं साफ शब्दों में बताईं और अपनी जिम्मेदारियां न निभा पाने के लिए बाइडन को आंशिक रूप से जिम्मेदार ठहराया।
किताब में आरोप लगाया गया है कि जो बाइडन के कमला हैरिस से निजी संबंध भी ठीक नहीं रहे हैं, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार यह कहते रहे हैं कि उनके हर बड़े फैसले में आखिरी आवाज उपराष्ट्रपति की ही होगी। मंगलवार को पोलिटिको में छपे किताब के एक अंश में कहा गया है कि 79 साल के जो बाइडन और 57 साल की कमला हैरिस के बीच दोस्ताना रिश्ते हैं, लेकिन वे ज्यादा करीब नहीं हैं।