बिगड़ैल बैल के तौर पर चर्चित और BJP से बर्खास्त होने के बाद घर के न घाट के वाली नौबत के बाद छठे दिन आज पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत को आखिरकार आज काँग्रेस में फिर ठिकाना मिल ही गया। जब वह नए घर में बहू अनुकृति के साथ जॉइन कर रहे थे तो काँग्रेस हाई कमान के एक भी बड़े नाम के दर्शन नहीं हुए। खुद हरक बेहद विनम्र-विनीत भाव में झुके कंधों के साथ नजर आए।
खास बात ये है कि हरक को काँग्रेस में प्रवेश उस वक्त मिला जब ये हल्ला अंदरखाने मचने लगा था कि वह फिर से बीजेपी में वापिस जाने के विकल्प पर भी ज़ोर लगा रहे हैं। बीजेपी के शीर्ष नेताओं में एक बारगी हरक को वापिस लेने के बाबत सोच-विचार होने भी लगा था। पार्टी में हरक के विरोधी या फिर नापसंद करने वाले भी इस सुगबुगाहट की जानकारी मिलते ही अचानक सक्रिय हो उठे थे। वे किसी भी सूरत में हरक को पार्टी में फिर लेने का विरोध और लामबंदी में जुट गए थे।
इसी बीच दिल्ली में आखिर हरक की मेहनत और रोना-धोना-आँसू काम आ गया। जो हरीश रावत लगातार हरक की काँग्रेस में Entry को ले के अड़ियल रुख अपनाए दिख रहे थे, वह मान गए। इसके बाद हरक को काँग्रेस में रोकने वाला कोई नहीं था। पीसीसी अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता विधायक दल प्रीतम सिंह के साथ ही प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव हरक को लेने के हक में थे।
काँग्रेस में वापसी के दौरान राहुल गांधी या पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी या फिर प्रियंका गांधी तो छोड़ो कोई और भी बड़ा नाम उपस्थित नहीं था। उनकी यशपाल आर्य और उनके बेटे संजीव सरीखी Dream जॉइनिंग नहीं हुई। BJP ने मंत्री पद और पार्टी से बर्खास्त कर हरक के बाजार भाव को अचानक गिरा डाला था। इसके चलते काँग्रेस में उनका प्रवेश न सिर्फ गड़बड़ा गया बल्कि वह मोल-भाव ढंग से करने की हैसियत से भी बाहर हो गए थे।
नौबत तो ये आ गई थी कि नामांकन का वक्त आ गया और वह बीच चौराहे में नीलामी के लिए खड़े होने के बावजूद अनबिके रहने की हैसियत में आ गए थे। गोदियाल-प्रीतम के कारण ही उनको आखिर काँग्रेस में प्रवेश मिल गया और हरीश भी अपनी सरकार गिराने के सबसे बड़े गुनहगार को लेने के लिए राजी हो गए। माना जा रहा है कि काँग्रेस का टिकट ससुर-बहू में से सिर्फ एक को मिलेगा, और चुनाव लड़ने का मौका अनुकृति को दिया जाएगा।