जमी झील में कंकड़ी, फेंक रहे हैं लोग।
क्यों हिलोर उठती नहीं, लगा रहे अभियोग।
चुनावी चौसर का मिजाज कुछ-कुछ कवि सत्यप्रसन्न की इन पंक्तियों जैसा ही है। रैलियों में नेता अपनी कह रहे हैं। मतदाता उनको परख रहे हैं। वे भी जमी झील में कंकड़ फेंक रहे हैं। हवा के रुख को भांपने के लिए। नेताओं के तरकश में राष्ट्रवाद, ध्रुवीकरण और जातियां हैं। इन सबके समीकरण हैं। मुद्दों का शोर भी तो है। सिर्फ शोर! जोर तो सिर्फ ध्रुवीकरण में है। अजीत बिसारिया बता रहे हैं लखनऊ, बाराबंकी और हरदोई का मौजूदा हाल…
मतदाताओं की दिल की बातों से पहले बातें चुनावी समरभूमि की। लखनऊ में विधानसभा की 9 सीटें हैं। बाराबंकी में 6 तो हरदोई में 8 सीटें हैं। यानी कुल 23 सीटें। बहरहाल 19 सीटों पर भगवा परचम फहरा रहा है। सपा के हिस्से चार सीटें हैं। बाकी दलों की दाल ही नहीं गली। न 2017 के चुनाव में नउपचुनाव में। बात वर्तमान की करें, तो मतदाताओं को कुरेदने पर जो कुछ सामने आ रहा है वह रोचक मुकाबले की तैयार होती पटकथा की ओर इशारा करता है। ज्यादातर सीटों पर भाजपा-सपा के बीच सीधी जंग के आसार बन रहे हैं। एक चीज और भी साफ हो जाती है कि मुद्दों से ज्यादा जोर जाति-मजहब का है। ऐसे में जो दल अपने आधार वोट बैंक के साथ सोशल इंजीनियरिंग से अन्य को साधने में कामयाब हो गया, उसके सिर पर ही ताज सजेगा। अलबत्ता कहीं-कहीं कांग्रेस, बसपा और आम आदमी पार्टी भी रोचक मुकाबले का हिस्सा बनेंगी।