सरकारी अस्पतालों में सात माह से करीब सौ वेंटिलेटर बंद पड़े हैं। जबकि बड़े संस्थानों में वेंटिलेटर के लिए वेटिंग है, वहीं निजी अस्पताल लूट मचाए हैं। निजी अस्पताल में वेंटिलेटर का एक दिन का औसत खर्चा 80-90 हजार रुपये तक है।
वेंटिलेटर यूनिट शुरू न करने के पीछे अस्पताल प्रभारी तर्क दे रहे हैं कि एक तो कुशल पर्याप्त स्टाफ नहीं है और दवाओं का भी संकट है। यदि यूनिट शुरू भी कर देते हैं तो बड़ी संख्या में स्टाफ व मैनपावर लगानी पड़ेगी। इससे दूसरे चिकित्सकीय कार्य बाधित होंगे।
बलरामपुर अस्पताल में 57 वेंटिलेटर हैं, लेकिन मई से एक भी नहीं चल रहा है। अफसरों का कहना है कि भर्ती मरीजों को तो वेंटिलेटर मुहैया कराया जाता है, लेकिन मगर बाहर से आने वाले मरीजों को तत्काल वेंटिलेटर की सुविधा नहीं दी जा रही है।
सीएमएस डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि तीसरी लहर की आशंका को लेकर भी वेंटिलेटर रिजर्व रखे गए हैं। पूरी क्षमता संग 24 घंटे वेंटिलेटर संचालन होने पर निजी अस्पतालों में भर्ती सभी मरीज यहां शिफ्ट हो जाएंगे। इसके लिए पर्याप्त स्टाफ लगाना होगा। ऐसे में दूसरे चिकित्सकीय काम बाधित होंगे।