सवा नौ करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड मामले में सीबीआई ने रोहतास ग्रुप के प्रमोटर्स के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। आईडीबीआई बैंक के उप महाप्रबंधक अनुराग वर्मा की तहरीर के आधार पर दर्ज हुए केस में 10 को नामजद किया गया है।
पहली एफआईआर में कहा गया कि 14 मार्च 2014 को आईडीबीआई बैंक ने रोहतास की कंपनी क्लेरियन प्रोजक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के लिए पांच करोड़ का लोन स्वीकृत किया। यह विभूतिखंड में 23,934 वर्गफीट जमीन के आधार पर दिया गया। कर्ज मांगने वालों ने बताया था कि जल्द एचडीएफसी बैंक से एनओसी लेकर दे देंगे, क्योंकि रोहतास ने प्रापर्टी पर वहां से भी लोन लिया था। यह एनओसी उस हिस्से के लिए लेनी थी, जिस पर आईडीबीआई ने लोन स्वीकृत किया था।
31 मार्च को क्लेरियन को लोन दे दिया गया। कुछ समय बाद कर्ज लेने वालों ने बैंक से अनुरोध किया कि लोन ग्रेटर नोएडा और गोमतीनगर के विभूति खंड स्थित दूसरी संपत्ति पर ट्रांसफर कर दिया जाए। बैंक ने इसे स्वीकार कर लिया। बाद में पता चला कि गोमतीनगर की संपत्ति बिल्डर ने पहले ही अखिलेश अग्रवाल को दे दी है।
संपत्ति अग्रवाल के कब्जे में थी, पर पंजीकरण नहीं हुआ था। इस तरह से बैंक से फ्रॉड कर लोन लिया गया है। बैंक ने 23 दिसंबर 2019 को कर्ज लेने वालों को घपलेबाज घोषित कर दिया। इसी तरह विभूतिखंड स्थित इसी प्रापर्टी पर 4.25 करोड़ का लोन रोहतास की ही कंपनी हाइब्रिड फार्म इनपुट्स लिमिटेड और पांच अन्य सह कंपनियों के नाम स्वीकृत किया गया।