एक तरफ लड़कियों की शादी की उम्र 18 से 21 साल करने को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है, दूसरी तरफ खाप पंचायतों ने इसका विरोध करने का निर्णय लिया है। महिला संगठन समर्थन में हैं, लेकिन वे सुरक्षा व रोजगार की गारंटी चाहती हैं। वहीं, आंकड़े बता रहे हैं कि पिछले चार साल में जिले में 38 नाबालिगों की शादी की कोशिश की गई थी।
कैबिनेट से मंजूरी के बाद अब संसद में प्रस्ताव पास करके पूरे देश में लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल की बजाय 21 साल करने की तैयारी है। इसके लिए तर्क दिया जा रहा है कि कम उम्र में शादी होने से लड़कियां न तो अच्छी तरह से पढ़ाई कर पाती हैं और ही परिवार की दूसरी जिम्मेदारी उठा पाती हैं।
ऐसे में अगर शादी की न्यूनतम आयु बढ़ाई जाती है तो लड़कियों के आगे बढ़ने में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। मुद्दे पर सामाजिक संगठन बंटे हुए हैं। कई संगठन जहां प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं, जबकि खाप पंचायत इसे गलत मान रही है। मुद्दे को लेकर जींद में खापों की महापंचायत 23 दिसंबर को होने जा रही है।
बेटियों को सुरक्षा व रोजगार की गारंटी भी मिले
शादी की उम्र 21 करना तो ठीक है, लेकिन अकेले कानून बनाने से कुछ नहीं होगा। सरकार को महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल से लेकर रोजगार की गारंटी भी देनी होगी। बेटियों को पढ़ने के बाद रोजगार भी चाहिए। – डॉक्टर जगमति सांगवान, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अखिल भारतीय जनवादी
महिला समिति
गरीब माता-पिता की परेशानी भी देखे सरकार
सरकार ग्रामीण एरिया में माहौल व हालात को भी देखे, जहां 10वीं व 12वीं करने के बाद गरीब माता-पिता बेटी की शादी करने की सोचता है। क्योंकि वह बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहता है। शिक्षा के आधार पर सरकार बेटियों की शादी की उम्र 18 से 21 साल करने का निर्णय तो लेने जा रही है, लेकिन हर पहलू पर विचार किया जाना चाहिए।- ओमप्रकाश नांदल, प्रधान नांदल खाप