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CM योगी आदित्यनाथ को नजरअंदाज,CM पुष्कर की बार-बार पीठ ठोंकी…

UP में ताजा प्रचार से CM योगी आदित्यनाथ को नजरअंदाज किया गया है। दूसरी तरफ उत्तराखंड के CM पुष्कर की बार-बार पीठ ठोंकी जा रही। इसको पार्टी और राष्ट्रीय मीडिया में हिन्दुत्व के प्रमुख चेहरे योगी की अहमियत में गिरावट और पुष्कर की लोकप्रियता व विश्वसनीयता के ग्राफ में ऊंचाई के तौर पर लिया जा रहा।

इसकी प्रमुख वजह शायद ये भी है कि योगी की लोकप्रियता में गिरावट आई है। पार्टी के असली सूत्रधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार समझे जाने वाले गृह मंत्री अमित शाह से उनके ठनने की खबरों का सामने आना भी मुमकिन है। योगी भी खुद के प्रचार में कोई कमी नहीं छोड़ते हैं। मोदी-शाह की प्रतिष्ठा इसके इतर खुद के सिवा किसी अन्य को तवज्जो न देने की है। मुमकिन है कि योगी को उनका नजरअंदाज किया जाना भी सोची-समझी चाल का हिस्सा हो।

योगी को स्वाभिमानी किस्म का माना जाता है। आला कमान के चुभने वाले रुख के सामने वह भी हथियार डालने वालों में से नहीं हैं। उनकी दिलेरी तब दिख गई थी जब UP सरकार के विज्ञापनों से प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का चेहरा उड़ा दिया गया था। बीजेपी के ताजा प्रचार से योगी का चेहरा गायब होने को इसी का बदला और योगी के साथ पार्टी तथा केंद्र सरकार के दो सबसे बड़े चेहरों के टकराव को देख रहे हैं।

योगी हिन्दुत्व का बहुत बड़ा चेहरा हैं। इसके चलते हिंदुत्ववादी पार्टी की छवि रखने वाली बीजेपी की हिम्मत योगी को भी उसी तरह बदलने की नहीं हुई, जैसी उसने उत्तराखंड में त्रिवेन्द्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत को बदल के दिखाई थी। इतना जरूर साफ हो चुका है कि आज की तारीख में योगी की रेटिंग बीजेपी और मोदी-शाह की निगाहों में नीचे आ चुकी है।

इसके इतर पुष्कर ने लगातार अपनी रेटिंग और विश्वसनीयता आला कमान और मोदी-शाह के सामने लगातार बढ़ाई है। आज सरकार में रहते किसी भी पार्टी का विधानसभा चुनाव जीत न पाने की परंपरा तोड़ने का विश्वास बीजेपी में झलक रहा है तो पुष्कर बड़ी और इकलौती वजह है। काँग्रेस TSR-1 और TSR-2 के दौर में सरकार बनाने को ले के बहुत आश्वस्त दिखती थीं। PSD सरकार आने के बाद वह बीजेपी को हल्के में लेने से बच रही है।