प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 4 दिसंबर को देहरादून में होने वाली रैली दरअसल उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में फिर से कमल खिलाने के अभियान की शुरुआत होगी। राज्य के सियासी इतिहास को मिटाने और नया बनाने का प्रयास होगा। रैली उत्तराखंड के मौजूदा सियासी मूड के बारे में काफी हद तक ईशारा कर सकती है। इसको कामयाब बनाने के लिए खुद CM और BJP के ओहदेदार जी-जान से जुटे हुए हैं।
उत्तर प्रदेश अगर राजनीतिक पहलुओं के मुताबिक फतह करना बीजेपी और मोदी के लिए मजबूरी है तो उत्तराखंड फतह करना मोदी के लिए अधिक जरूरी है। उनके विशिष्ट आराध्य बाबा केदार यहीं विराजमान हैं। ये तय है कि देहरादून रैली के साथ ही उत्तराखंड में चुनाव अभियान की लौ जल उठेगी। ये रैली अगर कामयाब रहती है तो राज्य में चुनावी माहौल के रुख का भी अंदाज हो सकता है।
इसमें शक जैसा कुछ नहीं है कि चुनाव तक फिर कई दौरे मोदी के होंगे। सियासी माहौल और मूड क्या रहेगा, ये देहरादून में 3 दिन बाद ही तय हो जाएगा। इसमें दो राय नहीं है। इस बात को बीजेपी और मुख्यमंत्री बाखूबी समझते हैं। इस पर बाजी लगाने जैसा कुछ नहीं है कि विधानसभा चुनाव न सिर्फ संघर्षपूर्ण रहेंगे बल्कि एक फतह पुष्कर का कद बीजेपी और देश भर में काफी ऊंचा कर डालेगी।
मोदी-गृह मंत्री अमित शाह और संघ के संरक्षण में चल रहे पुष्कर के लिए ये वाकई बहुत बड़ा और ऐतिहासिक पल साबित हो सकता है। आशंका सिर्फ इस पर है कि उत्तराखंड में एंटी इंकमबेनसी की सदा ही शीर्ष भूमिका रही है। इस चक्रव्यूह में बीजेपी-काँग्रेस हर बार सत्ता में रहने के दौरान फंसी है। उत्तराखंड भले छोटा है लेकिन मोदी भली-भांति जानते हैं कि अन्य राज्यों में बाद में होने वाले चुनावों में पार्टी के हक में माहौल बनाने के लिए यूपी के साथ ही देवभूमि में भी पार्टी ध्वज का शान से फहराया जाना बहुत जरूरी है।