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लो कलयुक पूर्व बागी : हरक-काऊ की काँग्रेस वापसी हरीश के वीटो से लटकी…

BJP सरकार में लगातार तकरीबन पाँच साल बतौर मंत्री गुजार चुके हरक सिंह रावत और विधायक उमेश शर्मा काऊ की पुरानी पार्टी काँग्रेस में वापसी उन्हीं हरीश रावत के वीटो के चलते लटक गई है, जिनके मुख्यमंत्री रहते वे उनकी सरकार गिरा के कमल के फूल की पंखुड़ियों में बैठ गए थे। अंदरखाने के उच्च सूत्रों के मुताबिक काँग्रेस उपाध्यक्ष और पार्टी के असल मुखिया राहुल गांधी के सामने हरीश ने साफ शब्दों में दोनों की पार्टी में वापसी पर ये कहते हुए वीटो लगा डाला कि वह हरक-काऊ और उनमें से किसी एक को ही चुन सकते हैं। दोनों को पार्टी में लिया जाता है तो उनके लिए फिर काँग्रेस में रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा।

राहुल के मामले में पार्टी के ही एक बड़े नेता ने `Newsspace’ से कहा कि हरीश ने राहुल के सामने शालीनता लेकिन सख्ती से अपनी बात रख दी है। वह किसी भी सूरत में हरक-काऊ को फिर काँग्रेस में लिए जाने के सख्त खिलाफ नजर आ रहे हैं। वह अपनी सरकार गिराए जाने और तमाम संकटों के लिए दोनों को जिम्मेदार मानते हैं। उनका मानना है कि जिन लोगों ने उनकी सरकार गिरने के लिए साजिशें रचीं, उनको किसी भी कीमत पर पार्टी में वापिस नहीं लिया जा सकता है।

ये बात दीगर है कि हरक ने हरीश के सामने माफी मांगते हुए ये भी कहा कि वह उनको कुछ भी कह सकते हैं। वह कुछ नहीं कहेंगे। ये ईशारा था कि वह हरीश की शरण और काँग्रेस में वापसी के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। पार्टी के कई दिग्गज भी हरक को काँग्रेस में लेने के फायदे देख रहे हैं। उनका मानना है कि हरक और काऊ के जीतने की तकरीबन गारंटी रहती है। दोनों आते हैं तो पार्टी को दो सीटों की बढ़त तो सीधे मिल जाएगी।

चुनाव अभियान समन्वय समिति के मुखिया होने के नाते अब हरीश बहुत ही शक्तिशाली और अहम भूमिका में हैं। ये तय है कि उनकी इच्छा के बगैर अब किसी की भी काँग्रेस में Entry मुमकिन नहीं है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल उनके विचारों को भरपूर तवज्जो देते हैं। खास पहलू ये भी है कि गणेश और हरक के आपसी रिश्ते बेहद अच्छे हैं। इस हकीकत से दोनों इंकार भी नहीं करते हैं। इसके बावजूद गणेश पूरी तरह सिर्फ और सिर्फ हरीश की इच्छाओं और विचारों को ही तरजीह दे रहे हैं। ये साफ है कि विधानसभा चुनावों में टिकटों के बँटवारे में दरअसल हरीश और गणेश की ही चलेगी। थोड़ी बहुत पूर्व अध्यक्ष प्रीतम सिंह और प्रांत प्रभारी की चल सकती है।

हरीश का पूर्व बागियों की घर वापसी के विरोध की एक अहम वजह उनको ये लगना भी है कि काँग्रेस सत्ता में वापसी कर रही है। हरक-काऊ सरीखों को लें या न लें। दोनों काँग्रेस में आ भी इसीलिए रहे कि उनको लग रहा कि अबकी बार काँग्रेस सरकार बनाएगी। ये साफ है कि हरीश के वीटो रहने तक हरक-काऊ की हाथ से हाथ मिलाने की इच्छा चुनाव से पहले तो मुश्किल ही रहेगी। इसका हल्का लाभ बीजेपी को भी इसलिए मिल सकता है कि हरक-काऊ के रुक जाने से पार्टी में भगदड़ का शोर थम सा गया है।