सुन्नी वक्फ बोर्ड के चैयरमैन एवं इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष जुफर फारूकी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बोर्ड को अयोध्या के धन्नीपुर गांव में मिली पांच एकड़ जमीन शरीयत और वक्फ एक्ट के खिलाफ नहीं है। कोर्ट ने ये जमीन बाबरी मस्जिद के विकल्प के तौर पर नहीं बल्कि संपति के रूप में दिया है। वक्फ बोर्ड ने इस जमीन की 9,29400 रुपये स्टाम्प ड्यूटी जमा की है।
दरअसल आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव एवं बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जीलानी सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में मिली 5 एकड़ जमीन को शरीयत और वक्फ एक्ट के बताते आ रहे हैं। जुफर फारूकी ने कहा कि कोई भी व्यक्ति शरिया और मुसलमानों का एक मात्र प्रतिनिधि होने का दावा नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि उनके बयान लोगों मे भ्रम पैदा करने वाले है। फारूकी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के किसी भी आदेश में यह उल्लेख नहीं किया गया कि धन्नीपुर गांव में पांच एकड़ जमीन बाबरी मस्जिद के विकल्प के रूप में दी गई। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस जमीन को संपति के रूप में दिया है। यह भूमि वक्फ भी नहीं है। यह नई भूमि है। इस भूमि का स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क 9,29,400 रुपये सोहावल तहसील में इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट के नाम से भुगतान किया गया है।