उत्तराखण्ड: कोरोना के चलते गंभीर आर्थिक संकटों का सामना कर रहे परिवहन निगम प्रबंधन ने 500 बसों को सरेंडर कराने का फैसला किया है। महाप्रबंधक दीपक जैन ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए। इस फैसले के बाद निगम के बेड़े में 600 बसें ही शामिल रहेंगी।
परिवहन निगम महाप्रबंधक में दीपक जैन ने बताया कि पुरानी बसों को ही सरेंडर कराया जा रहा है। जबकि तीन सौ नई बसों और तीन सौ पुरानी बसों का संचालन किया जाएगा। हालांकि फिलहाल 200 बसें ही संचालित की जा रही हैं। 500 बसों को सरेंडर करने से टैक्स के रूप में लाखों रुपये की बचत होगी।
बता दें कि इससे पूर्व प्रबंधन ने खर्चों में कटौती करते हुए कर्मचारियों के ओवरटाइम, प्रोत्साहन भत्ते पर रोक लगाने के साथ अधिकारियों के लिए सरकारी गाड़ी की सुविधा खत्म कर दी थी। प्रबंधन ने कई अन्य मदों में भी कटौती की योजना बनाई है।
महाप्रबंधक दीपक जैन का कहना है कि कोरोना संकट के चलते यात्रियों की संख्या ना के बराबर है। ऐसे में परिवहन निगम को गंभीर संकटों का सामना करना पड़ रहा है। निगम को कोरोना संकट से पहले प्रतिदिन 1.60 करोड़ रुपये की आमदनी होती थी। अब यह आंकड़ा सिर्फ 10 लाख पर सिमट गया है। जबकि सिर्फ डीजल पर ही प्रतिदिन 10 लाख रुपये खर्च होते हैं।
महाप्रबंधक दीपक जैन ने बताया कि वातानुकूलित अनुबंधित बसों और वोल्वो बसों को पहले ही सरेंडर किया जा चुका है। स्थितियां सामान्य होने पर बसों को संचालित करने का फैसला लिया जाएगा।