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CM पुष्कर सरकार की नई आबकारी नीति,,

पुष्कर सरकार की नई Excise Policy में कमाई को 11 फ़ीसदी बढ़ा के लक्ष्य 4440 करोड़ अगले वित्तीय वर्ष के लिए तय करने के साथ ही ये भी सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि पर्यटकों और मदिरा के शौकीनों को उनके Brands मिलने में दिक्कत न हो.दारू के इस्तेमाल में स्थानीय उत्पादों और किसानों के हितों को भी ध्यान में रखा जाए.जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल भी हो.

पुष्कर सरकार की नई Excise Policy में कमाई को 11 फ़ीसदी बढ़ा के लक्ष्य 4440 करोड़ अगले वित्तीय वर्ष के लिए तय करने के साथ ही ये भी सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि पर्यटकों और मदिरा के शौकीनों को उनके Brands मिलने में दिक्कत न हो.दारू के इस्तेमाल में स्थानीय उत्पादों और किसानों के हितों को भी ध्यान में रखा जाए.जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल भी हो.

CM पुष्कर सिंह धामी ने नई आबकारी नीति मिलावटी शराब को रोकने,पर्वतीय क्षेत्र में इनोवेशन और निवेश को प्रोत्साहन के लिए माइक्रो डिस्टिलेशन ईकाई की स्थापना का प्राविधान किया है.ये भी तय किया है कि इनको सूक्ष्म उद्योगों की श्रेणी में कम से कम क्षेत्रफल में स्थापित किया जा सकेगा. सरकार का दावा है कि इससे स्थानीय लोग आर्थिक रूप से सक्षम होंगे.हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

सरकार का मानना है कि उत्तराखंड में संचालित आसवानी में उच्च गुणवत्ता की मदिरा बनने से कमाई में इजाफा होगा.राज्य में प्रचुर मात्रा में उगने वाली वनस्पतियों, जड़ी-बूटियों का उपयोग होने से स्थानीय किसानों की आय के नए साधन उत्पन्न हो सकेंगे.राज्य में निर्मित मदिरा को विश्वस्तर पर पहचान मिलेगी।

सरकार का मानना है कि राज्य की उच्च गुणवत्तायुक्त जड़ी-बूटियों, फलों, फूलों तथा हिमालय की जलवायु, वातावरणीय शुद्धता-उच्च गुणवत्ता के जल स्रोत व कई अन्य वजह ऐसी हैं, जिसके चलते उत्तराखंड विश्वस्तरीय मदिरा/मॉल्ट के उत्पादन के हब के रूप में स्थापित और प्रतिष्ठित हो सकेगा।

सरकार की कोशिश है कि यूरोप में स्कॉटलैंड, इटली विश्वस्तरीय मदिरा के लिए जिस तरह विख्यात है, उसी तरह उत्तराखण्ड भी विश्व स्तरीय स्प्रिटामॉल्ट के उत्पादन केंद्र के रूप में अतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो. विदेशी मदिरा की भराई (बॉटलिंग) के लिए आबकारी राजस्व एवं निवेश के मद्देनजर पहली बार प्राविधान किए जा रहे हैं.

इसका मकसद प्रदेश को “उपभोक्ता राज्य से उत्पादक एवं निर्यातक राज्य के रूप में स्थापित करना है.प्रदेश में विदेशी मदिरा के थोक व्यापार को उत्तराखण्ड राज्य के मूल/स्थाई निवासियों के रोजगार के लिए भारत में निर्मित विदेशी मदिरा (IMFL) की आपूर्ति के थोक अनुज्ञापन / व्यापार (FL-2) अनुज्ञापन को उत्तराखण्ड के अर्ह नागरिकों को ही देने का भी प्रावधान किया गया है.

आबकारी राजस्व अर्जन की दृष्टि से पहली बार ओवरसीज मदिरा की आपूर्ति के लिए थोक अनुज्ञापन FL-2(O) का प्राविधान किया गया है. कस्टम बॉण्ड से आने वाली ओवरसीज मदिरा के व्यापार को इससे राजस्व हित में नियंत्रित किया जा सकेगा।

राज्य की कृषि/बागवानी से जुड़े लोगों के हित में देशी शराब में स्थानीय फलों यथा कीनू, माल्टा, काफल, सेब, नाशपाती,तिमूर, आड़ू के समावेश को अनुमन्य किया गया है.नई नीति में मदिरा दुकानों का व्यवस्थापन-नवीनीकरण, दो चरणों की लॉटरी, पहले आओ-पहले पाओ सिद्धांत पर पारदर्शी एवं अधिकतम राजस्व अर्जन की दृष्टि से किया जाएगा।

नवीनीकरण उसी अनुज्ञापी का किया जाएगा जिन पर कोई सरकारी देय न हो और प्रतिभूतियाँ सुरक्षित हों। आवेदक को आवेदन पत्र के साथ दो वर्ष का ITR दाखिल करना अनिवार्य होगा। एक आवेदक सम्पूर्ण प्रदेश में अधिकतम तीन मदिरा दुकानें ही ले सकेगा.समस्त जिलों में संचालित मदिरा दुकान के सापेक्ष उप दुकान खोले जाने की अनुमति राजस्व हित में दी जा सकेगी।

देशी मदिरा दुकानों में 36 प्रतिशत v/v तीव्रता की मसालेदार शराब या 25 प्रतिशत v/v तीव्रता की मसालेदार एवं सादा मदिरा एवं विशेष श्रेणी की मेट्रो मदिरा की आपूर्ति के प्राविधान किए गए हैं। विदेशी / देशी मदिरा के कोटे का अनतरण कोटे के अधिभार के 10% तक अनुमन्य होगा। विदेशी मदिरा में न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी का निर्धारण कर मदिरा ब्राण्ड का मूल्य पूर्व वर्षों की भाँति निर्धारित किया गया है. इससे आबकारी राजस्व सुरक्षित रहेगा.

उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर मदिरा उपलब्ध हो सकेगी.पर्यटन प्रोत्साहन एवं स्थानीय रोजगार की दृष्टि से पर्वतीय तहसील एवं जिलों में मॉल्स डिपार्टमेन्टल स्टोर में मदिरा बिक्री का अनुज्ञापन शुल्क ₹.5 लाख (पाँच लाख)/ दुकान का न्यूनतम क्षेत्रफल 400 वर्ग फुट का प्रविधान किया गया है।

भिन्न स्टार कैटेगरी के अनुसार बार अनुज्ञापन शुल्क निर्धारित किया गया है.पर्यटन की दृष्टि से सीजनल बार अनुज्ञापन शुल्क का प्रावधान इसी तरह किया गया है. अवैध कच्ची शराब के उत्पादन क्षेत्रों में लगातार प्रभावी प्रवर्तन कार्यवाही करने तथा ऐसे क्षेत्रों में वैध मदिरा की बिक्री को प्रोत्साहित करने के लिए उप दुकान का प्राविधान किया गया है।

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