चंद्रशेखर तुम्हारी ये कुर्बानी याद रखेगा हर हिंदुस्तानी, जब तक सूरज चांद रहेगा, चंद्रशेखर तुम्हारा नाम रहेगा, वंदे मातरम और भारत माता की जयघोष के साथ शहीद लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला को बुधवार को अंतिम विदाई दी गई। चित्रशिलाघाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले 38 साल बाद उनके पार्थिव शरीर को घर लाया गया तो उनकी पत्नी कुछ देर के लिए बेसुध हो गईं और दोनों बेटियां ताबूत से लिपटकर कर विलख पड़ीं। जब शांति देवी के पति शहीद हुए तब उनकी (शांति देवी की) उम्र सिर्फ 28 साल थी।
इस वीर सपूत को श्रद्धांजलि देने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मंत्री रेखा आर्या, गणेश जोशी, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, सैन्य अधिकारी और पूर्व सैनिक उनके घर पहुंचे हुए थे। अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट के हाथीगुर बिंता निवासी चंद्रशेखर हर्बोला 19-कुमाऊं रेजीमेंट में लांसनायक थे। मई 1984 में सियाचिन में पेट्रोलिंग के दौरान 20 सैनिकों की टुकड़ी के साथ वह भी ग्लेशियर की चपेट में आ गए। कुछ समय बाद सभी को शहीद घोषित कर दिया गया था। सेना की ओर से बीती 14 अगस्त को शहीद हर्बोला के परिजनों को उनका पार्थिव शरीर मिलने की सूचना दी गई।