बिजली विभाग में पुराने अधिकारी व कर्मचारी तो छोड़ो, जिन्हें पहली तैनाती पर्वतीय जिलों में दी गई, उनमें से ज्यादातर जाने को तैयार नहीं। इसकी तस्दीक यूपीसीएल प्रबंधन के तबादला आदेश कर रहे हैं, जिन्हें बार-बार बदलना पड़ा। पिछले कुछ महीनों के भीतर हुए तबादला आदेश देखने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि किस तरह यूपीसीएल प्रबंधन तबादले करने के बाद फिर कदम पीछे खींच रहा है।
17 जून को ऊर्जा भवन से विदाई, चार जुलाई को वापसी
ऊर्जा निगम ने 17 जून को सात लेखाधिकारियों की पहली तैनाती मुख्यालय से हरिद्वार, रुड़की, हल्द्वानी, रुद्रपुर, श्रीनगर आदि जगहों पर की गई। यह आदेश लागू हो भी गया लेकिन सात जुलाई को पूर्व का आदेश निरस्त करते हुए निगम प्रबंधन ने सभी की तैनाती निगम मुख्यालय में ही कर दी। सवाल यह है कि अगर निगम को इनकी जरूरत मुख्यालय में थी तो इनका तबादला पहले क्यों किया गया? अगर नहीं थी तो फिर तबादले का पूरा आदेश क्यों बदला गया?