PSD-2.O सरकार में अनेक छोटे-बड़े IAS-IPS अफसरों में संभावित फेरबदल को ले के बेचैनी-अकुलाहट है। 5 साल वाली सरकार और CM के होने के नाते ये तय है कि जिसकी किल्ली-गिल्ली इस बार उखड़ जाएगी, उसकी Batting फिर जल्दी नहीं आएगी। उसका लंबे समय तक टीम से बाहर रहना और पुनर्वास न हो पाना तय माना जा रहा है। विधानसभा चुनावों में नतीजों का अंदाज न लगा पाने और खेल करने वालों पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की गाज गिरनी तय समझी जा रही है।
सरकार में इस बार बेहद गोपनीय ढंग से फेरबदल को ले के कसरत चल रही। कुछ मामलों में तो किसी को भी भनक नहीं लग रही कि मुख्यमंत्री क्या कदम उठाने वाले हैं। पुष्कर सिर्फ बेहद जरूरी पहलुओं पर ही शासन में मौजूद बड़े हाकिमों से बात कर रहे हैं। अधिकांश फैसले वह अपने हिसाब से लेने के मूड में दिख रहे हैं। इसमें कितनी हकीकत है और कितना फसाना है, ये फेरबदल की List सार्वजनिक होने के बाद ही साफ होगा।
दोनों अहम बड़े काडर के अफसरों को ये बात साफ तौर पर समझ आ चुकी है कि पहले मौके पर ही चौके-छक्के लगा के अपनी सीट किसी तरह Front Row में लगानी होगी। इसमें जो पिछड़ जाएंगे, उनकी कुर्सी फिर बहुत बाद में जा के Front Row में लग पाएगी। जिन्होंने चुनाव में तटस्थ रहने के बजाए काँग्रेस की ताजपोशी पक्की समझ उसके सूबेदारों का स्वागत मीर जाफ़र की तरह करना शुरू कर दिया था, उनको बहुत दिक्कत होनी तय है।
इनमें कुछ IAS-IPS को ले के खासे गंभीर किस्म के भीतरी आरोप हैं। उसको ले के पुष्कर न सिर्फ पूरी रिपोर्ट जुटा चुके हैं, बल्कि ऐसे नौकरशाहों से बेहद खफा भी हैं। उन नौकरशाहों को अलबत्ता, सही कुर्सी और महकमे फिर भी मिल जाएंगे, जिन्होंने पुष्कर की मदद भले नहीं की, लेकिन चुनावी दिनों में बिना पार्टी बने तटस्थ रहे। कुछ IAS-IPS अफसरों को ले के माना जा रहा है कि वे चुनाव की लहर काँग्रेसमय लगने के बावजूद किसी न किसी ढंग से BJP और PSD के प्रति वफादारी बिना कायदे-कानून तोड़े निभाई।