Team PSD में अभी तक IAS या IPS कैडर से एक भी Seniors या Juniors की विधिवत तैनाती नहीं की गई है। मुख्यमंत्री इस मामले में जल्दबाज़ी करने के बजाए सोच-समझ के फैसला करने पर यकीन कर रहे। वरिष्ठ IPS अभिनव कुमार अलबत्ता, CMO में इस बार प्रमुख सचिव के ओहदे पर दिख जाए तो ताज्जुब नहीं होगा।
पिछली बार पुष्कर ने फटाफट अपनी टीम बना ली थी। CMO में न सिर्फ जल्दी तैनातियाँ की गई थीं बल्कि ऐसा भी माना गया कि जरूरत से अधिक लोगों को भर दिया गया था। इसमें सरकारी और गैर सरकारी (BJP-संघ-खुद के करीबी) लोग शामिल थे। तब विधानसभा के आम चुनाव का दबाव था, जो सिर पर थे। ऐसे में पुष्कर के पास बहुत अधिक वक्त टीम बनाने के लिए नहीं था। न ही किसी को बहुत बारीकी से देखने-भालने का मौका ही था।

5 साल के कार्यकाल वाले पुष्कर के पास अब वक्त का दबाव नहीं है। साथ ही खुद की और सरकार की छवि व प्रतिष्ठा को निखारने के लिए उनके लिए फौरी से अधिक सोच के और वक्त ले के किए गए फैसले व तैनातियाँ अधिक मायने रखेंगी। यही वह कर रहे हैं। पुष्कर के पिछले कार्यकाल के दौरान नौकरशाहों और सियासी लोगों की भीड़ कैंप ऑफिस के साथ ही आवास पर भी दिखती थी। उनको वहाँ CM से मुलाक़ात का वक्त भी आसानी से मिल रहा था। ऐसा अब नहीं है। इन दिनों आवास पर भीड़ तकरीबन गायब है। जिनको जरूरी कार्यों से बुलाया जाता है, वे ही आ रहे।
आला किस्म के नौकरशाह और पिछली टीम के सदस्य (नौकरशाह-गैर सरकारी) भी अब आवास और कैंप ऑफिस पर नहीं आ रहे। सिर्फ बुलाने पर ही आते हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री इस बार भी पुरानी टीम को साथ रखना चाहेंगे या उसको नई सूरत देंगे? दूसरा विकल्प अधिक मजबूत दिख रहा। IAS अफसर और प्रभारी सचिव विनोद सुमन इन दिनों CM के दफ्तरों-आवास पर इन दिनों सबसे अधिक दिख रहे। उनको अहम कामकाज भी खूब सौंपे जा रहे। सचिवालय सेवा वाले संयुक्त सचिव और CM के करीबियों में शुमार संजय सिंह टोलिया और सत्य प्रकाश रावत के साथ ही गिरिजा शंकर जोशी तथा कुछ अन्य गैर अफसर दिखते हैं लेकिन उनकी भी नियुक्ति नहीं की गई है। ये सभी पिछली PSD सरकार में भी CMO का हिस्सा थे।