बिहार से गुजरात के सूरत ले जाई जा रही छह बालिकाओं की ट्रेन में बरामदगी का मामला और पेचीदा हो गया है। जीआरपी थाने से इन बालिकाओं को चाइल्ड लाइन के सुपुर्द किया गया था। चाइल्ड लाइन ने सभी को बाल कल्याण समिति/न्यायपीठ के समक्ष पेश किया। जहां से उन्हे लखनऊ के बाल गृह भेज दिया गया। अब इस मामले में मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी हो गई है।
शनिवार की रात करीब एक बजे चाइल्ड लाइन को सूचना मिली थी कि अवध एक्सप्रेस में दो लोगों द्वारा कुछ बालिकाओं को ले जाया जा रहा रहा है। 6 से 10 साल की यह सभी बालिकाएं सहमी हुई हैं। इस पर चाइल्ड लाइन के निदेशक रत्नेश कुमार ने रात में ही जीआरपी थानाध्यक्ष अनूप कुमार के साथ ट्रेन से बच्चियों को बरामद कर लिया था।
जीआरपी ने दोनों व्यक्तियों को हिरासत में ले लिया था। दोनों ने खुद को बिहार के समस्तीपुर जिले का निवासी बताया था। एक व्यक्ति ने उनमें से खुद को एक बालिका का पिता बताते हुए कहा था कि सभी को सूरत एक मदरसे में पढ़ाने के लिए ले जा रहे थे।
रविवार की शाम तक अन्य परिजन भी रेलवे स्टेशन पहुंच गए थे। सोमवार को चाइल्ड लाइन ने बालिकाओं को बाल कल्याण समिति/न्यायपीठ के समक्ष पेश किया। जहां बालिकाओं को ले जा रहे दोनों लोगों व बालिकाओं के बयान भिन्न पाए गए। सूरत में बालिकाओं के साथ कोई व्यस्क महिला न होने की बात भी पता चली।
चाइल्ड लाइन के निदेशक रत्नेश कुमार ने बताया कि न्यायपीठ के आदेश पर बालिकाओं को बाल सुधार गृह भेजा गया है। जांच में यह मामला बहुत संदिग्ध पाया गया है। पुलिस को कार्रवाई के आदेश मिले हैं। इस संबंध में जीआरपी थानाध्यक्ष अनूप कुमार का कहना है कि न्यायपीठ के आदेश से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। आदेश मिलते ही मुकदमा दर्ज कर विवेचना की जाएगी।