अर्थात सरस हो या अत्यंत नीरस, अपनी कविता किसे अच्छी नहीं लगती। किंतु जो दूसरे की रचना को सुनकर हर्षित होते हैं, ऐसे उत्तम पुरुष जगत में बहुत नहीं हैं॥ पूर्वांचल की धरती पर पहुंची चुनावी यात्रा पर गोस्वामी तुलसीदास की ये पंक्तियां सटीक बैठती हैं। चुनाव आगे तो बढ़ा था मुद्दों के रथ पर सवार होकर। पर, मतदान करीब आते-आते रथ कहीं पीछे छूट गया। काफी पीछे…। अब तो महारथियों के रणकौशल का इम्तिहान है। इसलिए साधन नहीं, साधक अहम है। दिखाई भी दे रहा है। सुनाई भी दे रहा है। अब चुनाव उस दौर में पहुंच गया है जहां छवियां अहम हैं। प्रतिमान-कीर्तिमान अहम हैं। अब तो हमले के नए औजार हैं। सीधे वार-पलटवार है। इसलिए नए राग हैं। नई कविताएं है। लफ्जों की छेनी से नई मूर्तियां गढ़ी जा रही हैं। महिमा मंडित की जा रही हैं। …तो विरोधी खेमे की मूर्तियां खंडित भी की जा रही हैं। आप भी लोकतंत्र के उत्सव का मजा लीजिए। पर, ध्यान रहे इन सियासी छेनियों का असर आपके संबंधों की तुरपाई पर न पड़े। रिश्तों की मिठास पर न पड़े। बहरहाल, आज पढ़ें गोरखपुर, पथरदेवा, बलिया नगर, बैरिया, रसड़ा, फेफना और बांसडीह में किस ओर बह रही है सियासी बयार…
शहर विधानसभा क्षेत्र से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाजपा प्रत्याशी हैं। पांच बार सांसद और पांच साल से मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी निभा रहे योगी आदित्यनाथ के सामने अन्य दलों के सभी प्रत्याशी राजनीति के नए खिलाड़ी हैं। सपा ने भाजपा से आईं सुभावती शुक्ला, बसपा ने ख्वाजा शम्सुद्दीन और कांग्रेस ने चेतना पांडेय को मैदान में उतारा है। ये सभी पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं।
आंकड़ों पर निगाह डालें तो स्पष्ट हो जाता है कि शहर विधानसभा क्षेत्र भाजपा का गढ़ है। जब भाजपा की लहर नहीं थी, तब भी कमल खिलता रहा है। पिछले 33 वर्षों से सीट पार्टी के पास है। अब योगी आदित्यनाथ प्रत्याशी बनाए गए हैं। वह पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। इसका प्रभाव भी मतदाताओं में दिखता है। मतदाता कहते हैं कि योगी की अगुवाई में ही भाजपा उत्तर प्रदेश का चुनाव लड़ रही है। चुनाव का मुख्य मुद्दा विकास ही है। गोरखपुर की सूरत बदल गई है। किसी तरह के पहचान का संकट नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के इलाज की सुविधा मिल चुकी है। फोरलेन सड़कों का जाल बिछ गया है।
गोरक्षपीठ का गहरा प्रभाव : शहर विधानसभा क्षेत्र में ही गोरखनाथ मठ है। इसका खासा प्रभाव रहता है। गोरक्षपीठाधीश्वर रहे महंत अवेद्यनाथ गोरखपुर शहर लोकसभा क्षेत्र से सांसद थे। उन्होंनेे जैसा चाहा, वैसे ही राजनीतिक समीकरण बनते रहे। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही गोरक्षपीठाधीश्वर हैं।