काँग्रेस उत्तराखंड में सरकार बनाएगी या विपक्ष में बैठेगी, ये गारंटी नहीं है। अलबत्ता, पार्टी में अभी से CM बनने की जंग रंग लेने लगी है। हरीश रावत ने साफ कह दिया है कि सरकार के मुखिया वही बनेंगे। नहीं तो घर ही बैठना पसंद करेंगे। उनका परोक्ष विरोध नेता विधायक दल प्रीतम सिंह ने ये कहते हुए कर दिया कि मुख्यमंत्री तय करने का हक हाई कमान के पास है’। BJP भी हरीश पर टूट पड़ी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि, `हरदा आपको घर ही बैठना है। फिक्र न करें। पार्टी की शिकस्त के बाद अब आप आराम से जिंदगी गुजारेंगे। हमने बंदोबस्त कर दिया है’। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता रवीद्र जुगराण ने भी कहा,`हरीश के बयान में उनकी अपरिपक्वता और हताशा झलक रही है’।
हरीश ने ये कहा है कि उनके पास काँग्रेस की सरकार आने के बाद सिर्फ मुख्यमंत्री बनने या फिर घर बैठने का विकल्प है। उनके इस बयान से उनकी पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और सरदारों-सूबेदारों के बीच की जंग का आभास सीधा-सीधा हो रहा है। प्रीतम सिंह को भी मुख्यमंत्री की कुर्सी का दावेदार शुरू से माना जा रहा है। असली जंग इस सबसे बड़ी कुर्सी के लिए हरीश और प्रीतम के बीच ही दिखती रही है। ये इत्तफाक की बात है कि ND तिवारी काल में दोनों एक साथ थे और तिवारी-इन्दिरा की किलेबंदी और वर्चस्व को लगातार चुनौती देते रहते थे। आज दोनों में 36 का आंकड़ा जग जाहिर हो चुका है।