BJP के चुनाव घोषणा पत्र (वैसे माना जा रहा है कि वह कल दृष्टि पत्र ला रही) में देरी के पीछे बेशक उसके Think Tank की कोई रणनीति छिपी होगी लेकिन इसे पार्टी के हक में नहीं माना जा रहा। इसके चलते Congress को उस पर हमला करने का शानदार मौका मिल गया। पार्टी की तरफ से गौरव वल्लभ और रागिनी नायक ने कहा कि ऐसा सिर्फ इसलिए हो रहा है कि BJP सरकार साल 2017 के विधानसभा चुनाव में किए गए एक भी वादे को पूरा करने में नाकाम रही है। वह इसके चलते घबराई हुई है। हिचकिचा रही है। BJP की तरफ से इसका जवाब प्रदेश प्रवक्ता सुरेश जोश और मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने Press Conference में देते हुए कहा कि अधिक से अधिक जनसुझावों को शामिल करने की कोशिशों के चलते घोषणापत्र में जान बूझ के देरी की गई। इसे कल सार्वजनिक किया जाएगा
BJP के घोषणा पत्र का इंतजार सिर्फ काँग्रेस ही नहीं कर रही। अवाम और मीडिया भी ये जाने के लिए बेसब्र है कि आखिर 5 साल सरकार में रहने के बाद सत्तारूढ़ पार्टी क्या नई घोषणाएँ ले के आने वाली है। पिछले चुनाव में उसने जो वादे अपने घोषणा पत्र में किए थे, उनके बारे में भी वह कोई जिक्र बतौर उपलब्धि करेगी या नहीं। बीजेपी की तरफ से ये दावा किया जा रहा था कि वह जान बूझ के घोषणा पत्र को जारी नहीं कर रही है। वह काँग्रेस का कथित घोषणा पत्र देखने के बाद ही अपना घोषणा पत्र सामने लाएगी। जो सियासी नजरिए से एकदम दुरुस्त और अवाम के लिए बेहतरीन होगा।
सच ये है कि दोनों ही दलों को खुद के ऊपर यकीन शायद नहीं है। अंदरखाने की खबरों पर यकीन किया जाए तो BJP सिर्फ अपना Vision लोगों के सामने पेश करेगी, न कि घोषणा पत्र लाएगी। वह दृष्टि पत्र के नाम पर अपनी सोच और संकल्प को पेश कर अगले चुनावों में लोगों के सवालों और विपक्षी दलों के तानों से बचने की कोशिश कर रही है। घोषणापत्र नाम ने देने को ले के हमला करने का कोई कारण व हक काँग्रेस के पास नहीं रह गया है। खुद वह घोषणापत्र लाने से इस कदर डर गई कि प्रियंका गांधी की मौजूदगी में प्रतिज्ञा पत्र जारी हुआ, न कि घोषणापत्र।
काँग्रेस की सोच और नीतियों को दरकिनार कर अगर देखा जाए तो बीजेपी के घोषणा पत्र या दृष्टि पत्र में न सिर्फ बहुत देरी हो गई है बल्कि काँग्रेस ने आज उसको इस मुद्दे पर जम के लपेट भी लिया। गौरव वल्लभ और रागिनी नायक जैसी केन्द्रीय प्रवक्ताओं ने कहा कि बीजेपी का घोषणापत्र में देरी करना उसके इस डर को जतलाता है कि 5 साल की सरकार के बावजूद वह पिछले चुनावों की घोषणाओं पर अमल नहीं कर पाई और अब वह नई घोषणाएँ या वादे करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही।
गौरव ने कहा कि जो पार्टी घोषणापत्र तक नहीं ला पा रही, उसकी सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए। सच ये है कि डबल इंजन की सरकार ने डबल भ्रष्टाचार दिया। मनरेगा के राष्ट्रीय बजट में भारी कटौती कर 98 हजार करोड़ से 73 हजार करोड़ कर दिया गया है। इससे उत्तराखंड के हिस्से में भी कम पैसा मनरेगा में आएगा। राज्य में रोजगार गारंटी कम से कम 40.9 दिन है। इसके कम हो के 38.13 दिन होने की दशा पैदा हो गई है। मैदान और पहाड़ों में खेती खराब होने पर मनरेगा ही रोजी-रोटी का सहारा था। बजट में कटौती से ये भी कमजोर पड़ जाएगा।