जंगली जानवरों के आतंक से थराली के ग्रामीणों ने खेतों में मेहनत करना छोड़ दिया है, जिससे बड़े-बड़े खेत बंजर हो चुके हैं और खेतों में अब बंदर और लंगूर दिन में तो जंगली सुअर, बारसिंघा रात में अठखेलियां करते नजर आते हैं। जब खेतों में जानवरों ने बर्बादी शुरू कर दी तो अधिकांश लोग यहां से रोजगार की तलाश में मुंबई, दिल्ली और देहरादून चले गये हैं।
कभी कुलसारी के प्याज की खेती और सोल पटटी की आलू की फसल पूरे उत्त्राखंड में प्रसिद्ध थी, लेकिन जब किसानों की खून पसीने की गाढ़ी कमाई को जंगली जानवरों ने बर्बाद करना शुरू किया तो अब ये किसान भी घर-बार छोड़ने को मजबूर हैं। राज्य गठन के बाद पिंडर घाटी में विकास की किरण दूर ही नजर आ रही है। न सड़कें ही ठीक हैं और न अस्पताल में डाक्टर हैं, स्कूलों में शिक्षकों की कमी के चलते अभिभावक अपने नौनिहालों को शहरों में भेजने को मजबूर हैं।
थराली विधानसभा के प्रमुख मुददे
– जंगली जानवरों से खेती को भारी नुकसान आपदा का दंश झेलने को मजबूर
– सीमांत क्षेत्र होने के चलते सरकारों ने विकास पर नहीं दिया ध्यान
– पूरे विधानसभा थराली में एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बना रैफरल सेंटर
– न एक्से की सुविधा और न अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में भी सुविधाओं का अभाव
– भालू की गुलदार के बढ़ते हमले से लोग गांव छोड़ने को मजबूर
– विधानसभा थराली की लाइफ लाइन कहीं जाने वाली थराली-देवाल-वाण मोटर मार्ग बदहाल
– देवाल और नारायणबगड़ महाविद्यालय बिना शिक्षकों के
– देवाल और नारायणबगड़ तहसील बिना स्टाफ के केवल नाम के
– पर्यटक स्थल ग्वालदम में सुविधाओं को अभाव