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उत्तराखण्ड: मतदान की तारीखों को लेकर विरोध जारी…

प्रदेश के कुछ राजनीतिक दलों ने सर्द मौसम और प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए मतदान के लिए रविवार का दिन और मार्च के पहले सप्ताह की तिथि तय करने का अनुरोध किया है। दलों का कहना है कि इससे मतदान कर्मचारियों के साथ ही मतदाताओं की मुश्किलें कुछ कम होगी।

प्रदेश में ठिठुरनभरे इस मौसम में कई जगह हिमपात होने से न सिर्फ मतदान कर्मचारियों को बल्कि स्थानीय लोगों को भी खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ दलों का मामना है कि दूरदराज के क्षेत्रों में बर्फ गिरने से मतदान के दिन इन क्षेत्रों के लोगों को मतदान केंद्रों तक पहुंचने में पेरशानी होगी। जिससे मत प्रतिशत गिर सकता है। उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी के मुताबिक पूर्व में गोवा में मार्च महीने में चुनाव हुए। जबकि उत्तराखंड में फरवरी महीने में चुनाव कराए गए। जबकि इसके उलट होना चाहिए था।

उक्रांद के केंद्रीय उपाध्यक्ष किशन सिंह मेहता के मुताबिक पहाड़ में विकट परिस्थितियां हैं। हिमपात, बारिश और कोविड की वजह से लोग पहले ही मुश्किल में हैं। ऐसे में दूरदराज के क्षेत्रों में पोलिंग पार्टियों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी दिक्कत हो सकती है।

जिसे देखते हुए फरवरी के अंतिम सप्ताह या फिर मार्च महीने में मतदान कराया जाना चाहिए। भाकपा माले के गढ़वाल सचिव इंद्रेश मैखुरी का कहना है कि सर्द मौसम में बर्फ गिरने से पोलिंग पार्टियों एवं मतदाताओं के सामने दिक्कत पेश आ सकती है। इसके अलावा प्रदेश में कोरोना भी तेजी से पांव पसार रहा है। स्थानीय लोगों के साथ ही बड़ी संख्या में अधिकारी व कर्मचारी इससे संक्रमित हैं। समस्या को देखते हुए मतदान मार्च महीने में कराए जाने चाहिए।