प्रदेश में आचार संहिता लागू होने से पहले करीब छह सौ से अधिक के तबादलों पर आयोग का चाबुक चला है। शासन ने तबादला पाने वाले सभी शिक्षकों के तबादले रोक दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि इस बीच यदि किसी शिक्षक व कर्मचारी ने नए तैनाती स्थलों पर पदभार ग्रहण कर लिया है तो उसे वापस अपने मूल तैनाती स्थल में जाना होगा।
प्रदेश में आचार संहिता लगने से पहले माध्यमिक शिक्षकों के पांच और बेसिक के शिक्षकों के तीन आदेश जारी किए गए। आदेश में तैनाती के कॉलम में कुछ शिक्षकों को तीन से चार विकल्प दिए गए तो एक शिक्षिका की तैनाती में हरिद्वार और देहरादून नगर क्षेत्र का स्कूल लिखा गया। चुनाव से ठीक पहले इन तबादलों से विभाग में अफरातफरी मची थी। सोमवार 10 जनवरी को अमर उजाला में इस खबर के प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद चुनाव आयोग ने भी मनमाने तबादलों पर चाबुक चलाया।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने मुख्य सचिव से शिक्षकों एवं कर्मचारियों के तबादलों पर रिपोर्ट मांगी। जिसके बाद अब शासन की ओर से आदेश जारी किया गया है कि शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादलों के लिए महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा को अनुमति दी गई। इस संबंध में महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा ने अपने 12 जनवरी के पत्र में शासन को बताया है कि उन्होंने शासन के इस आदेश पर आगे की कोई कार्रवाई नहीं की।