CM पुष्कर सिंह धामी ने Dinner Diplomacy अपना के अपने मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत को इस्तीफा न देने के लिए मना तो लिया लेकिन विवादों को खाने-पीने-ओढ़ने के सरताज मृत्युंजय मिश्र को जेल से बाहर आने के बाद आयुर्वेद विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार जैसी अहम पोस्टिंग दे के आयुष मंत्रालय भी संभाल रहे हरक ने मानो एक बार फिर BJP और सरकार के लिए संकट के बीज बो डाले। विवाद रूपी बर्र के छत्ते पर फिर हौले से पत्थर मार दिया। माहौल फिर बिगड़ते देख CM ने Damage Control शुरू कर आनन-फानन मंत्री से फोन पर बात कर इस तैनाती पर रिपोर्ट तलब कर ली है।
हरक जिस भी दल में रहे, कभी सरकार और पार्टी के लिए मजबूत स्तम्भ दिखते रहे तो कभी भीषण सिर दर्द। वह ऐसे राजनेता हैं, जिनके जीतने की गारंटी रहती है। जो फैसले करते समय आगा-पीछा सोचते नहीं। विवादों से न घबराना और उसका पीछा कर बल्कि उसको आगोश में लेना उनकी फितरत सी कही जा सकती है। वह अगले पल क्या बोल दे और क्या कदम उठा दे, ये कोई भी पहले से नहीं सोच सकता है।
कोटद्वार मेडिकल कॉलेज के बहाने उनका कैबिनेट की बैठक से अचानक मैं इस्तीफा दे रहा हूँ, कह के उठ जाना इसी लिए कईयों को हैरान नहीं करता। चुनावी मौसम में एक-एक सीट अहम होने और हरक की सीट निकलने की उम्मीद तगड़ी होने और माहौल को बनाए रखने के मद्देनजर BJP और CM ने उनको जैसी-तैसे रोकने को तवज्जो दी। अभी इस मामले की मेहँदी सूखी भी नहीं थी कि मृत्युंजय को रजिस्ट्रार बना के हरक ने एक किस्म से फिर हालात से पंगा ही लिया है।