राजकीय दून मेडिकल कालेज अस्पताल में लगभग दो साल के इंतजार के बाद आखिकार एमआरआई मशीन पहुंच गई। इसे इंस्टॉल करने में दस दिन लगेंगे। उसके बाद ट्रायल किया जाएगा जिसके बाद जांच शुरू कर दी जाएंगी।
शहर में यातायात प्रभावित न हो इसलिए मशीन और उसके विभिन्न पार्ट्स 36 टायर वाले दो ट्रकों से शुक्रवार अस्पताल पहुंचाए गए। अस्पताल के पुराने भवन के समीप स्थित एमआरआई विंग में जगह की कमी के कारण ट्रकों को नए भवन परिसर में खड़ा किया गया।
मशीन को अब इंस्टॉल करने का कार्य शुरू किया जाएगा। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केसी पंत, एमआरआई प्रभारी महेंद्र भंडारी और उनका स्टाफ लगातार इस पर नजर लगाए हैं। इसके अलावा संबंधित कंपनी के इंजीनियर और उनका अन्य स्टाफ भी मशीन के पार्ट्स जोड़ने व इंस्टॉल करने की प्रक्रिया पर मंथन कर रहे हैं। एमआरआई प्रभारी महेंद्र भंडारी ने बताया कि मशीन को इंस्टॉल करने में लगभग 10 दिन लग जाएंगे। इसके बाद ट्रॉयल और फिर एमआरआई जांच शुरू कर दी जाएगी।
मरीजों को झेलनी पड़ रही थी परेशानी
राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में एमआरआई जांच करीब दो साल से ठप है। अस्पताल प्रशासन ने नई मशीन आने तक ठेके पर किसी निजी लैब से एमआरआई कराए जाने की भी पहल की थी, पर दरें कम होने के कारण किसी ने भी इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई।
अस्पताल में एमआरआई की सुविधा न होने के कारण मरीजों को खासी दिक्कत झेलनी पड़ रही थी। निजी अस्पतालों या डायग्नोस्टिक केंद्रों में एमआरआई आठ हजार से 12 हजार रुपए तक में होती है। जबकि दून अस्पताल में साढ़े तीन हजार रुपए में होती है। अस्पताल में रोजाना औसतन 25 मरीजों की एमआरआई जांच की जाती थी। अमर उजाला समाचार पत्र इस मामले को लगातार प्रमुखता से प्रकाशित करता आया है।