सत्ता पक्ष व विपक्ष के विधायक एक साथ सरकार पर हमलावर हुए तो हर कोई दंग रह गया। कांग्रेस के काजी निजामुद्दीन ने सदन में विशेषाधिकार हनन का मामला उठा के शुरुआत की। सदन में बेरोजगारी पर गलत सूचना देने का आरोप लगाया। संसदीय कार्यमंत्री बंशीधर भगत ने कहा कि यह विशेषाधिकार का मामला नहीं बनता है। सिर्फ कुछ आंकड़े छूट गए थे।
हंगामे के दौरान सत्ता पक्ष के विधायक भी सरकार के खिलाफ लामबंद नजर आए। भाजपा के राजेश शुक्ला, कुंवर प्रणव सिंह व देशराज कर्णवाल कड़े तेवर अपनाते दिखे। निजामुद्दीन ने हालात देख के काले शनिवार का दर्जा दे डाला। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के विधायक ही वेल में आ रहे हैं। ये असामान्य बात है। प्रणव सिंह ने पीठ से कहा कि अगर सरकार निर्णय लेने में अक्षम हैं तो आप फैसला लें। इस पर कोई जवाब न मिलने से नाराज विधायक वेल में आ गए।
मौका न चूकते हुए विपक्ष से आवाज आई कि उपाध्यक्ष साहब (पीठ पर मौजूद रघुनाथ सिंह को संबोधित करते हुए) देख लो। आप की सरकार में क्या हो रहा है। नेता प्रतिपक्ष प्रीतम ने कहा कि हम आप के साथ हैं। बीजेपी के राजेश शुक्ला भी बहुत नाखुश और आक्रामक दिखे। उन्होंने खड़े हो के कहा कि 65 का नोटिस है, जिला पंचायत में मेरा अपमान हुआ। कोई कार्रवाई नहीं हुई। डीएम ने भी मेरा अपमान किया। उसका भी नोटिस दिया गया है। एक साल से भी ज्यादा का समय हो गया है। कुछ नहीं हुआ। ऐसा ही रहा तो विधायक चौराहों पर पिटा करेंगे। स्पीकर ने कहा कि अभी परीक्षण हो रहा हैं।