सरकार ने सुर्खियों के सरताज दीपक रावत को कुमायूं का आयुक्त बना दिया। इसके साथ ही ये चर्चा भी नौकरशाही में शुरू हो गई कि उनको फिर से अतिरिक्त तवज्जो मिल गई। उनके बैच (साल 2007) वाले आर राजेश कुमार और विनय शंकर पांडे अभी DM की कुर्सी पर हैं। प्रभारी सचिव अलबत्ता कई हैं।
राजेश देहरादून और विनय हरिद्वार के कलेक्टर हैं। इस बैच में षणमुगम, दीपेंद्र चौधरी, नीरज खैरवाल, सुरेन्द्र नारायण पांडे और विनोद सुमन भी शामिल हैं। ये शासन में प्रभारी सचिव हैं। दीपक को कुमायूं का आयुक्त बनाए जाने के पीछे ये भी माना जा रहा है कि सरकार और नौकरशाह देहरादून और हरिद्वार की कलेक्टरी को कुमायूं के आयुक्त के समकक्ष या फिर बेहतर मानती है। ये सच है कि नौकरशाही में अगर राकेश शर्मा का दौर छोड़ दिया जाए तो कुमायूं के आयुक्त की कुर्सी पर बैठने के लिए कोई ऐसा अफसर कभी खुशी-खुशी तैयार नहीं हुआ, जिसके पास अपने जुगाड़ सरकार में थे।
दीपक के पास सिर्फ पिटकुल के MD का चार्ज रह गया था। UPCL और UJVNL के MD का जिम्मा उनसे पहले ही हटा दिया गया था। अपनी कार्यशैली और जिलों में ही रहने की छाप के कारण वह हमेशा सोशल मीडिया के नायक बनते रहे हैं। मंगलवार रात तक हालांकि उनके बारे में भी फैसला हो चुका था लेकिन विधिवत आदेश आज ही हो पाए। दीपक का मन DM से इतर देहरादून की पोस्टिंग में नहीं लग रहा था।