पुण्यसलिला सरयू रामनगरी को तीन ओर से घेरती है पर शुक्रवार को रामनगरी आस्था के प्रवाह से घिरी नजर आई। श्रद्घालु 14 कोस की परिधि में प्रत्येक वर्ष कार्तिक शुक्ल नवमी के दिन रामनगरी की परिक्रमा करते हैं। एक वर्ष में परिक्रमा मार्ग को स्पर्शित करती सरयू से काफी पानी गुजर जाता है पर परिक्रमा है कि युगों से अटूट है। कोरोना के चलते पिछले दो वर्षों से प्रभावित रही चौदहकोसी परिक्रमा की रौनक इस वर्ष तब बयां हुई जब लाखों श्रद्घालु तय मुहूर्त से पूर्व ही परिक्रमा पथ पर उमड़ पड़े। शुभ मुहूर्त पूर्वाह्न 10:22 बजे से करीब एक घंटा पहले ही रामनगरी की 14 कोसी परिधि श्रद्घालुओं से जकड़ उठी। रामनगरी की रज शिरोधार्य कर परिक्रमा शुरू कर रहे श्रद्धालु आराध्य का जयकारा लगाते आगे बढ़ रहे थे।
परिक्रमा मेले में लाखों श्रद्घालुओं की भीड़ से सरयू घाट गुलजार रहा। राम सियाराम, सियाराम जय जयराम..की ध्वनि घाटों पर गूंज रही थी। सरयू में स्नान करने के लिए भक्तों की भीड़ जुटी रही। बड़ी संख्या में भक्तों ने सरयू घाट से परिक्रमा का शुभारंभ किया, जिनकी परिक्रमा पूरी होती गई वे सरयू में स्नान को भी पहुंचे। सरयू घाटों पर पुलिस लाउडस्पीकर के जरिए श्रद्धालुओं को गहरे पानी में न जाने की हिदायत भी देती रही।
14 कोसी परिक्रमा के मुहूर्त से पूर्व ही जय श्रीराम के जयकारे के साथ भक्तों ने परिक्रमा शुरू कर दी। नाका हनुमानगढ़ी से बड़ी संख्या में भक्तों ने परिक्रमा का आगाज किया। नाका हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ जुटी रही। नाका के सचिन, राजेश तीसरी बार तो चौक निवासी निखिल चौथी बार आस्था के इस पथ का साक्षी बनने उतरे। कहा कि परिक्रमा से आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक दोनों फायदे होते हैं।
पिछले दो वर्षों से कोरोना के चलते रामनगरी के पर्व-त्योहार प्रभावित रहे। कार्तिक परिक्रमा मेला भी इससे अछूता नहीं रहा। किसी तरह कोविड प्रोटोकाल के बीच परिक्रमा की परंपरा का निर्वहन होता रहा, पर बाहरी श्रद्घालुओं पर रोक के चलते बहुत सारे भक्तों की परिक्रमा करने की कड़ी टूट गई थी। इस वर्ष फिर से नए उत्साह व जोश के साथ लाखों श्रद्घालु परिक्रमा के जरिए पुण्यार्जन को अयोध्या उमड़ चुके हैं। चौदहकोसी परिक्रमा के शुभ मुहूर्त पूर्वाह्न 10:22 बजे से पहले ही श्रद्धालुओं ने परिक्रमा का शुभारंभ कर दिया।