अब एक और महापुरुष देश के लिए शहीद हो गए देश के अन्नदाता के लिए शहीद हो गए बाबा राम सिंह का सिख समाज के पूज्य थे, आज वो हमारे बीच नहीं रहे कितना दर्द हुआ होगा जब एक संत अन्याय को नहीं देख पाए| संत की मनोदशा राजनैतिक मनोदशा नहीं है नाही एक आम मनोदशा है .
संत समाज देश को ,अपने समाज को अपने बच्चों को उस परमात्मा को पूर्ण रूप से समर्पित होता है, यह वह लोग नहीं समझ सकते जिनको सत्ता की भूख हो अपने-अपने की भूख जो दूसरों के लिए करना ही नहीं जानते उनको दर्द का क्या पता ,ऐसे ही एक संत थे देवराहा बाबा जो राम मंदिर की दुर्दशा को देखकर मारकाट देखकर अपने प्राण त्याग दिए थे आज वही फिर दोहराया गया और आज एक संत फिर शहीद हो गए , कब तक इस देश के सत्ताधारी दुराचारी, दुराचार करते रहेंगे , भारत को स्वर्ग से नर्क बनाने में जिन का बहुत बड़ा योगदान है वह राजनीति है राजनीति तब तक ठीक है , जब तक किसी का अहित ना हो आज हमारे समाज के पूज्य अपना त्याग कर रहे हैं , ऐसे भी क्या हट जिसको हराया नहीं जा सकता,. बाबा साहब की शहीदी बेकार नहीं जाएगी हम सब देशवासी संत समाज अपने लोग भारत के साथ हैं बिकने नहीं देंगे लूटने नहीं देंगे”.
यह खबर नहीं संपादक की विचारधारा है समस्त देशवासियों को समर्पित है सभी योगदान दें अपने लोगों के साथ खड़े”अनामिका देवा”