भले ही 2022 के विधानसभा चुनाव में अभी सवा साल बाकी हैं, लेकिन प्रदेश के साथ दूसरे राज्यों में सक्रिय राजनीतिक दल भी यूपी की राजनीति में अपने भविष्य की संभावनाओं पर सक्रिय हो गए हैं। वे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हों या ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता असदुद्दीन ओवैसी।
ये कितना सफल होंगे, यह विधानसभा चुनाव के नतीजों से पता चलेगा पर बुधवार को ओवैसी और अतीत में भाजपा की साथी रही सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के नेता ओमप्रकाश राजभर की मुलाकात 2022 के समीकरणों से भविष्य की सियासत एवं प्रदेश में अपने-अपने पैर जमाने की संभावनाएं तलाशने की तरफ ही इशारा करती है।
वैसे ओवैसी पहली बार यूपी के चुनाव में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। वे बीते कई चुनावों से यूपी में अपनी संभावनाएं तलाशते रहे हैं। विधानसभा का 2017 का चुनाव हो या 2019 का लोकसभा चुनाव। लेकिन अकेले दम पर एआईएमआईएम कोई चमत्कार नहीं कर पाई।