उत्तराखण्ड: यौन व अन्य अपराधों से पीड़ित महिलाओं और उनके आश्रितों को अपराध की घातकता के हिसाब से एक लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी। गृह विभाग के इस योजना के प्रस्ताव को प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दे दी गई। योजना के तहत अपराध पीड़ित महिलाओं के घावों पर सरकार मुआवजे का मरहम लगाएगी।

इसके लिए उत्तराखंड यौन अपराध एवं अन्य अपराधों से पीड़ित/ उत्तरजीवी महिलाओं हेतु प्रतिकर योजना 2020 के तहत एक पीड़ित महिला प्रतिकर निधि का गठन होगा। इस निधि से राज्य व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मुआवजे की दरें निर्धारित कर उसका भुगतान पीड़ित महिला या उसके आश्रित को किया जाएगा।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में होंगे आवेदन
महिला अपराध के मामले में पुलिस जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से प्रथम सूचना रिपोर्ट अनिवार्य रूप से साझा करेगी। इससे अंतरिम प्रतिकर के लिए सत्यापन की प्रक्रिया हो सकेगी। पीड़ित या आश्रित जिला विधि सेवा प्राधिकरण के समक्ष या उनके पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में होंगे आवेदन
महिला अपराध के मामले में पुलिस जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से प्रथम सूचना रिपोर्ट अनिवार्य रूप से साझा करेगी। इससे अंतरिम प्रतिकर के लिए सत्यापन की प्रक्रिया हो सकेगी। पीड़ित या आश्रित जिला विधि सेवा प्राधिकरण के समक्ष या उनके पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।
यू बंटेगा मुआवजा
राज्य विधिक से प्राधिकरण के माध्यम से मुआवजे की धनराशि पीड़ित अथवा आश्रितों के एक या संयुक्त खाते में भेजी जाएगी। पीड़ित के नाम पर खाता नहीं होगा तो संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बैंक खाता खुलवाने की सुविधा उपलब्ध कराएगा। अव्यस्क का खाता अभिभावक के साथ खुलेगा। यदि पीड़ित बाल संरक्षण संस्था में है तब बैंक खाता संस्थान के अधीक्षक के साथ खोला जाएगा। विदेशी नागरिक होने पर कैश कार्ड के माध्यम से क्षतिपूर्ति की जाएगी। 25 प्रतिशत धनराशि प्रारंभिक खर्चे के लिए दी जाएगी। 75 प्रतिशत धनराशि तीन साल की अवधि के लिए एक सावधि खाते में जमा होगी।
मुआवजा राशि की दरें (लाख में)
क्षति
जीवन क्षति/ सामूहिक बलात्कार 05 10
बलात्कार/ अप्राकृतिक यौन उत्पीड़न 04 07
स्थायी विकलांगता या किसी अंग की 80 फीसदी हानि 02 05
40 फीसदी से अधिक और 80 से कम विकलांगता 02 04
20 से अधिक और 40 फीसदी से अधिक विकलांगता 01 02
शारीरिक व मानसिक क्षति, जिसमें पुनर्वास की आवश्यकता हो 01 02
भ्रूण की हानि/ हिंसा से गर्भपात/ प्रजनन क्षमता की हानि 02 03
बलात्कार के कारण गर्भावस्था के मामले 03 04
जलने के कारण
विरूपता के मामले में 07 08
50 फीसदी से अधिक के मामले में 05 08
20 से अधिक व 50 फीसदी से कम 03 07
20 फीसदी से कम के मामले में 02 03
एसिड हमले में
चेहरा खराब करने के मामले में 07 08
50 फीसदी से अधिक क्षति 05 08
20 से अधिक व 50 फीसदी से कम 03 05
20 फीसदी से कम क्षति के मामले में 03 04