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चीन के कदमों पर भड़का अमेरिका….

वॉशिंगटन: भारत-चीन के बीच चल रहे तनाव के बीच अमेरिका ने एक बार फिर चीन को खरी-खोटी सुनाई है. अमेरिका ने कहा है कि चीन भारत के खिलाफ लगातार आक्रामक है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव केली मैक्नेनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हवाले से कहा कि ‘इलाके में भारत सहित दूसरे देशों के प्रति चीन का आक्रामक रवैया उसकी कम्युनिस्ट पार्टी वाली सत्ता का असली चेहरा है.’ प्रेस सचिव ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद और तनाव के बीच अमेरिका स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका चाहता है कि इसका कोई शांतिपूर्ण समाधान निकले.

मैक्नेनी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस संबंध में सवाल पूछे जाने पर कहा, ‘भारत-चीन संबंध में हम स्थिति पर नजर रख रहे हैं. राष्ट्रपति की नजर भी इस पर है और उन्होंने कहा है कि भारत-चीन सीमा पर चीन का जो रुख है, वो चीन के बड़े स्तर पर अपनाए गए आक्रामक रुख का हिस्सा है. चीन की यह हरकतें चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी का असली चेहरा हैं.’

पिछले सात हफ्तों से पूर्वी लद्दाख के कई हिस्सों में भारतीय और चीनी सेना के जवान आमने-सामने आ गए थे. इसके बाद 15 जून की रात को गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच बड़ी हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें भारत के 20 सैनिकों की जान चली गई थी. चीनी सेना को भी नुकसान हुआ था, लेकिन उनकी ओर से अभी तक कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है.

इसके पहले कांग्रेस की एक सुनवाई के दौरान अमेरिकी सांसदों ने भी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर (LAC) चीनी सेना की गतिविधियों को लेकर चिंता जताई थी. हाउस इंटेलीजेंस कमिटी के अध्यक्ष एडम शिफ ने कहा, ‘इस पिछले महीने में चीन LAC पर घातक झड़पों में लिप्त रहा है, जिसमें दर्जनों भारतीय जवानों की जानें गई हैं. वहीं चीनी सेना में भी कुछ सैनिकों की मौतें हुई हैं.’

Brookings Institute की सीनियर फेलो तन्वी मदान ने कमिटी को बताया कि मई की शुरुआत से ही चीनी सेना की ओर से LAC पर दोनों देशों के बीच स्थित वास्तविक सीमा पर यथास्थिति को बदलने की लगातार कोशिशें की गई हैं. उन्होंने कहा कि चीनी सेना की यह हरकत और कोरोनावायरस महामारी के चलते भारत, अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन को लेकर नजरिया प्रभावित हुआ है और होता रहेगा. मदान ने कहा कि अक्टूबर, 2019 में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिले थे तो उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की बात की थी लेकिन इन दोनों वजहों से यह साफ दिखा है कि पिछले कुछ दशकों की कोशिशों के बाद भी दोनों देशों के संबंध बहुत ही स्तरीय और प्रतिस्पर्धात्मक हैं, जो कभी भी संघर्ष में बदल सकते हैं.

मदान ने कहा कि भारत सरकार ने चीन को इशारे दिए हैं कि सीमा विवाद, खासकर यथास्थिति को दोबारा लागू न करने पर बडे़ स्तर पर संबंधों पर असर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि चीन को लेकर सार्वजनिक दृष्टिकोण के लिहाज से गिरावट आई है, वहीं भारत में बड़े स्तर पर चीन के खिलाफ माहौल देखा जा रहा है. वहां यह माना जा रहा है कि चीन के साथ संबंधों का एक बार आकलन करना जरूरी है.

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