संवाददाता:अनामिका मिश्राजेवर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के जेवर स्थित बनवारी वास गांव में मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। 12 साल के मासूम गोपाल शर्मा की बेरहमी से की गई हत्या ने न केवल परिवार को तोड़ दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र में डर और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।
पूरा मामला?
प्राप्त विवरण के अनुसार, 12 साल के गोपाल शर्मा की हत्या महज एक सामान्य अपराध नहीं, बल्कि एक बेहद क्रूर और शैतानी कृत्य है। परिवार और स्थानीय लोगों का आरोप है कि बच्चे के शरीर को क्षत-विक्षत किया गया, उसकी आंखें निकाल दी गईं और शरीर के संवेदनशील अंगों को निशाना बनाकर अमानवीय यातनाएं दी गईं। इस वीभत्स घटना ने लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल
इस मामले में प्रशासन की कार्यशैली पर कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं:
▪️दबाव की राजनीति: पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें लगातार डराया और . धमकाया जा रहा है ताकि वे चुप रहें।
▪️आवाज दबाने का प्रयास: मामले की गंभीरता को देखते हुए जब परशुराम दल के ▪️राष्ट्रीय अध्यक्ष वहां पहुंचे, तो उन पर ही भड़काने का आरोप लगाकर विभिन्न धाराओं में कार्रवाई करने का प्रयास किया गया। लोगों का कहना है कि प्रशासन दोषियों को बचाने की कोशिश कर रहा है।
▪️दोषियों की गिरफ्तारी पर संशय: सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि जिन लोगों को पकड़ा गया है, वे मुख्य अपराधी नहीं हैं। असली दरिंदे अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
इंसाफ की मांग और जन आक्रोश
यह घटना किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंसानियत के खिलाफ अपराध है। 12 साल के मासूम गोपाल का क्या कसूर था? ग्रामीणों और समाज के विभिन्न वर्गों का कहना है कि यह ‘हिंदू-मुस्लिम’ का मुद्दा नहीं, बल्कि एक शैतानी दिमाग का काम है जिसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग इस बात से हताश हैं कि यूपी प्रशासन इस रूह कंपा देने वाली घटना पर चुप्पी साधे हुए है। परशुराम दल और ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, असली गुनहगारों को फांसी की सजा दी जाए और पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।