अनामिका मिश्रा एडिटर/ देहरादून की सड़कों पर जस्टिस श्रीमान मनोज तिवारी न्यायाधीश हाई कोर्ट नैनीताल की छवि को एक पोस्ट पर लगाकर शहर में वह पोस्टर लगाए गए|
कुछ लोगों ने अपने नाम को अपने चेहरे को पोस्ट के नीचे लगाते हुए व्यापार मंडल का परिचय देते हुए बड़े अहंकार से पोस्टजगह-जगह शहर में लगाने का काम किया |

आते जाते जन समुदाय के लोग पोस्ट को देखते पोस्ट की फोटो खींचते और न्यायपालिका पर सवाल करते नजर आए क्या कानून व्यवस्था में किसी भी न्यायाधीश का व्यापार कमेटी किसी राजनीतिक दल से किसी प्रकार का कोई संबंध होता है????
न्यायमूर्ति न्याय के देवता है जनता का विश्वास उनके प्रति न्याय की दृष्टि से होता है जब न्यायाधीश ही सख्त नहीं होंगे तो जनता को क्या न्याय पर भरोसा होगा? राजनीतिक पार्टियों की तरह आज न्यायाधीशों के भी पोस्ट जगह-जगह लगने लगे, लगता है न्यायिक प्रक्रिया भी भी राजनीति से प्रेरित है|
*भारत में किसी भी हाई कोर्ट के जज को किसी भी व्यवसायिक संगठन या सोसाइटी से मिलकर अपने नाम या किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर बैनर लगाने का अधिकार नहीं है. जज सार्वजनिक पद पर होता है और उन्हें भारतीय संविधान के अनुसार कार्य करना होता है, जिसके तहत उन्हें निष्पक्ष और तटस्थ रहना होता है. जिस तरीके से यह क्रियाकलाप देहरादून की सड़कों पर देखने को मिला उससे नहीं लगता न्यायपालिका के न्यायिक विचाराधीन मामलों में जनता को कुछ और देखने की आवश्यकता है| फिर भी एक सवाल है क्या यह अनैतिकृत न्यायपालिका की सहभागिता से हुआ है