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उत्तराखंड :Secretary की कुर्सी का !!राधा को फिर Extension या नया चेहरा

CM पुष्कर सिंह धामी राज्य में Chief Secretary की कुर्सी पर अगले महीने कोई नया चेहरा बिठाना पसंद करेंगे या नौकरशाही की मौजूदा और First Lady Boss राधा रतूड़ी को एक और Extension दे सकगे हैं?नौकरशाही में इसको ले के कयासों का दौर शुरू हो चुका है.अंदरखाने की खबर रखने वालों का मानना है कि मुख्यमंत्री की अगली चाल और सोच को पकड़ पाना आसान नहीं होता है.इस मामले में ऊँट किसी भी करवट ले सकता है.RR को एक और सेवा विस्तार और उनके उत्तराधिकारी के तौर पर उत्तराखंड IAS Cadre के Senior Most आनंदबर्द्धन को बिठाया जा सकता है.

3 महीने नियमित मुख्य सचिव रहने के बाद CM पुष्कर ने 6 महीने का सेवा विस्तार राधा को दिया हुआ है.उदारवादी और बेहद सरल स्वभाव की स्वामिनी और विवादों से कोसों दूर रहने वाली राधा को CS के तौर पर अजय विक्रम सिंह-मधुकर गुप्ता-दिवंगत डॉ रघुनन्दन सिंह टोलिया-M रामचंद्रन-सुभाष कुमार-आलोक जैन-राकेश शर्मा-डॉ सुखबीर सिंह संधू की पांत में शुमार नहीं किया जाता है.अजय विक्रम-रामचंद्रन बोलने में कंजूस लेकिन खौफ पैदा करने में कम नहीं थे.

मधुकर गुप्ता को बेहद सुलझा हुआ समझा जाता था.डॉ टोलिया मुंहफट और मिट्टी से जुड़े थे.आलोक जैन CM के सामने भी कड़वा और खरा-खरा बोलने में न हिचकने वाले थे.राकेश शर्मा हकीम किस्म के नौकरशाह थे.उनके पास सरकार-CM की हर दिक्कत-रोग को ठीक करने की मीठी गोली हुआ करती थी.उनके रहते कोई भी दिक्कत न CM BC खंडूड़ी को हुई न विजय बहुगुणा-हरीश रावत को.वह तीनों के बेहद प्रिय और विश्वासपात्र रहे.देहरादून में तमाम अवस्थापना सुविधाओं का श्रेय उनको दिया जा सकता है.

डॉ संधू से भी मातहत वाकई कांपते या फिर कम से कम घबराते तो थे.मुख्य सचिव को नौकरशाहों का अभिभावक समझा जाता है.राधा में ये खासियत है कि उनसे कोई भी छोटा हो या बड़ा या फिर आम आदमी,छोटा-मोटा-गली-मोहल्ले वाला नेता,बेहिचक-बेधड़क विश्वास के साथ अपनी बात और समस्या-विचार रख सकता है.उत्तराखंड के लोग इसी किस्म की संस्कृति और नौकरशाह को अधिक पसंद करते हैं.यहाँ राधा का Account पूरा ठसा ठस भरा हुआ है.एक अहम पहलू ये है कि राधा के दौर में नौकरशाह बिना किसी दबाव में काम करने की छूट हासिल किए हुए हैं.किसी को भी उनसे किसी किस्म की नाराजगी या असंतोष हो,ऐसा कहीं नहीं दिखाई देता है.

RR के बाद 1992 बैच के आनंदबर्द्धन उनकी कुर्सी के दावेदार हैं.उनकी सुनहरी तकदीर है कि उनको जिन अन्य से CS के लिए चुनौती मिल सकती थी, वे किसी न किसी वजह से उनके सामने से हट गए.1990 बैच की मनीषा पंवार ने स्वास्थ्य वजहों से VRS लिया तो उनके पति और आनंदबर्द्धन के बैचमेट उमाकांत पंवार ने उनसे पहले IAS की नौकरी छोड़ दी.सिर्फ एक बैच पीछे (1992 वाले) डॉ राकेश कुमार की छवि जोरदार थी.उन्होंने भी VRS ले लिया.आज तस्वीर ये है कि आनंदबर्द्धन को बैच के हिसाब से चुनौती देने वाला दूर-दूर तक नहीं है.

उनके बाद सबसे वरिष्ठ नौकरशाह तेज तर्रार रमेश कुमार सुधांशु फिरउनके ही बैच के लालरिनरैना फैनई हैं.दोनों 1997 बैच के हैं.उनके पास नौकरी बहुत बची है.उनके बैच में ही भूपेन्द्र कौर थीं.वह भी VRS ले के सेवा से निकल गईं.सुधांशु-फैनई की लम्बी नौकरी बची है. जैसे DGP अभिनव कुमार के खाते में अभी भी नौकरी के 8 साल बचे हुए हैं.अभिनव को मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड में उपलब्ध 2 सीनियर्स पर तरजीह देते हुए Police Chief बनाया.क्या ऐसी मिसाल वह CS और IAS Cadre में भी कायम करना चाहेंगे,ये दावा करने की सूरत में कोई नहीं है.सेवा विस्तार के लिहाज से October का महीना RR के लिए आखिरी है लेकिन CM पुष्कर चौंकाने में महारथी हैं.इस पर उनको ले के PhD हो सकती है.

CM को करीब से जानने वालों की सुनें तो राधा फिर 3 महीने के लिए State Bureaucracy की Boss बन जाए तो हैरानी नहीं होनी चाहिए.फ़िलहाल तेल देखिए और तेल की धार.PSD पूर्ववर्ती तमाम मुख्यमंत्रियों से जुदा किस्म के हैं.वह संतुलित बोलने और बेहद सोच समझ के फैसले लेने वालों में शुमार होते हैं.कोई भी मसला बड़ा मुद्दा या विवाद में बदल जाए,उससे पहले वह ठोस कदम उठा के उसको ख़त्म करने में यकीन रखते हैं.राधा उनकी सोच और उत्तराखंड की माटी-संस्कृति में फिट बैठती हैं.इसी लिए उनको बिना किसी सिफारिश या दबाव के बावजूद उत्तराखंड की पहली महिला CS होने का सम्मान दिया.फिर 6 महीने का Extension.उनके एक और सेवा विस्तार या फिर उत्तराधिकारी पर एकाध हफ्ते में तस्वीर साफ़ हो जाने की उम्मीद है.