मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरूवार को सर्वे चौक स्थितIRDT सभागार में कहा कि समान नागरिक संहिता महिलाओं को सशक्त करने में मील का पत्थर साबित होगा.उत्तराखंड की अवाम इस कानून को लागू कराने के पीछे असल शक्ति रही.स्वर्णिम देवभूमि परिषद के नागरिक अभिनंदन समारोह में बड़ी तादाद में बुद्धिजीवियों, जनप्रतिनिधियों एवं अन्य प्रमुख लोगों ने UCC का श्रेय पुष्कर को देते हुए कहा कि वह असल में ठोस-समाज कल्याण से जुड़े साहसिक फैसले लेने वाले मुख्यमंत्री हैं.अन्तर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन ने भी CM का अभिनन्दन किया.
मुख्यमंत्री UCC को लागू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को प्रेरणास्रोत करार दिया और उनके साथ ही केन्द्र सरकार आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी सरकार ने समान नागरिक संहिता पर जनता से किए वादे को निभाया। यह कानून जनता के लिए है. जनता की भलाई, समता और समानता के लिए है। हमने 2022 के विधान सभा चुनाव से पहले प्रदेश की जनता से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ’’एक भारत और श्रेष्ठ भारत’’ मन्त्र को साकार करने के लिए इस कानून का वादा किया था।
CM ने कहा कि प्रदेश की देवतुल्य जनता ने हमें इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए अपना आशीर्वाद देकर फिर सरकार बनाने का मौका दिया। सरकार गठन के तुरंत बाद जनता के आदेश को सिर माथे पर रखते हुए हमने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही समान नागरिक संहिता बनाने के लिए विशेषज्ञ समिति के गठन का निर्णय लिया था. 27 मई 2022 को उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में पांच सदस्यीय समिति गठित की। सिक्किम उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश प्रमोद कोहली, समाजसेवी मनु गौड़, उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह एवं दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो० सुरेखा डंगवाल को इसमें शामिल किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राप्त सुझावों का अध्ययन कर समिति ने उनका रिकॉर्ड समय में विश्लेषण कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट 2 फरवरी 2024 को सरकार को सौंपी। समान नागरिक संहिता विवाह, भरण-पोषण, गोद लेने, उत्तराधिकार, विवाह विच्छेद जैसे मामलों में भेदभाव न करते हुए सभी को बराबरी का अधिकार देगा.विशेष रूप से माताओं-बहनों और बेटियों के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करेगा. हमारी आधी आबादी को सच्चे अर्थों में बराबरी का दर्जा और न्याय मिलेगा.
मुख्यमंत्री ने लिव इन संबंधों पर कहा कि एक वयस्क पुरुष जो 21 वर्ष या अधिक का हो और वयस्क महिला जो 18 वर्ष या उससे अधिक की हो, वे तभी लिव इन रिलेशनशिप में रह सकेंगे, जब वो पहले से विवाहित या किसी अन्य के साथ लिव इन रिलेशनशिप में न हों. कानूनन प्रतिबंधित संबंधों की श्रेणी में न आते हों। लिव-इन में रहने के लिए केवल पंजीकरण कराना होगा. सरकारी नौकारियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण देकर उनसे किए गए वादे को निभाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश हित में UCC से पहले हमारी सरकार ने कठोर नकल विरोधी कानून बनाया। उत्तराखंड के लिए गर्व की बात है कि भारत की संसद ने भी इस पर अपनी मुहर लगा दी है। अवैध कब्जे पर सख्त कार्यवाही कर 5 हजार हेक्टेयर सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। धर्मांतरण को रोकने के लिए भी कानून बनाया गया। भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण के लिए 1064 एप पर शिकायत की व्यवस्था की गई है।
अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन ने भी CM पुष्कर का UCC लागू करने पर अभिनन्दन किया
अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन ने भी प्रदेश अध्यक्ष राम गोपाल गोयल के नेतृत्व में मुख्यमंत्री आवास पहुँच के उनको शॉल ओढ़ा के गुलदस्ता दे के अभिनंदन किया. वैश्य महासम्मेलन के ओहदेदार दीपक सिंघल, श्याम अग्रवाल,संगठन के महानगर अध्यक्ष विशाल गुप्ता और महामंत्री निकुंज गुप्ता भी अभिनन्दन करने वालों में शामिल थे.