दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे पर जब 100 से 125 की स्पीड में दौड़ते हुए वाहन डाटकाली मंदिर के बाद आगे आशारोड़ी क्षेत्र में उतरेंगे तो मौजूदा स्थितियों में बॉटल नेक में आकर फंस जाएंगे। दिल्ली से देहरादून का सफर तो ढाई घंटे में पूरा हो जाएगा, लेकिन यदि किसी को दून के सहस्रधारा पहुंचना है, तो इतना ही समय और लग जाएगा।
राज्य निर्माण के बाद देहरादून के राजधानी बनने से यहां वर्ष दर वर्ष वाहनों की संख्या व बढ़ती गई और उसके अनुपात में सड़कों की चौड़ाई कम होती गई। राजधानी की कोई सड़क ऐसी नहीं है, जो जाम से अछूती हो। ऐसे में सवाल उठ रहे कि एक्सप्रेस-वे बनने के बाद वीकेंड पर दिल्ली, हरियाणा और यूपी से उमड़ने वाले वाहनों के दबाव को मौजूदा सड़कें कैसे झेलेंगी।