पूस का महीना ठंड से कंपकंपाने के लिए मजबूर करने लगा है। मंगलवार की रात शहर का तापमान 10 डिग्री के आसपास था। ऐसे में करीब 80 वर्षीय बेघर वृद्धा को पूरी रात खुले आसमान के नीचे गुजारनी पड़ी। बेबसी के कारण बुजुर्ग महिला को सड़क पर पड़े एक गंदे बोरे का सहारा लेना पड़ा। सामान की तरह खुद को बोरे में बंद करके वृद्धा ने रात काटी।
बुधवार की सुबह मझोला के लाकड़ी फाजलपुर इलाके में घरों से निकले कुछ लोग जब ठिठुरते हुए आगे बढ़ रहे थे तो ऊपर से बंद एक बोरे को हिलता-डुलता देखकर ठिठक गए। कोई अज्ञात डर से घबराया तो कोई उस ओर कदम बढ़ाने में सकपकाया। एक शख्स ने हिम्मत करके बोरे का मुंह खोला। भीतर देखा तो आंखें फटी रह गईं। जड़ों से कट चुके बूढ़े पेड़ की तरह मुरझाई महिला बोरे में सिर झुकाए बैठी थीं। तन पर कोई गर्म कपड़ा न था, न ही पास में कोई सामान। सिर छिपाने के लिए आसरा न होने की बात हालात ने बता दी। पूछे गए किसी सवाल का जवाब वृद्धा के मुंह से नहीं निकला।