उत्तराखंड में छह सालों में 15837 हेक्टेयर जंगल को आग से भारी क्षति पहुंची। इस अवधि में पूरे प्रदेश में 9918 वनाग्नि की घटनाएं हुईं। पिछले वर्ष राज्य में वनों को सबसे अधिक नुकसान हुआ। वनाग्नि 2780 घटनाओं में 3927 हेक्टेयर क्षेत्र दावानल की भेंट चढ़ गया।
उत्तराखंड के वनों पर गर्मियां बहुत भारी पड़ती हैं। बढ़ती तपिश के बीच राज्य के वन क्षेत्र को आग की लपटे घेर लेती हैं। वनाग्नि की ये घटनाएं ऐसे स्थानों पर होती हैं, जहां तक पहुंचना आसान नहीं होता। वन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच साल में आग की घटनाओं से वनों को यदि सबसे अधिक नुकसान 2021 में हुआ तो 2020 में दावानल की सबसे कम घटनाएं हुईं।
ये कोरोनाकाल का समय था, जब पर्यावरण में मानव जनित ऊर्जा और तपिश में अप्रत्याशित कमी का जंगलों पर सकारात्मक प्रभाव दिखा और वनों में आग की कम घटनाएं हुईं। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020 में वनाग्नि की केवल 135 घटनाएं हुईं और केवल 172.69 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा। फायर सीजन में वनाग्नि राज्य सरकार और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की चिंता का सबब बनी है