उस दोपहरी मैं अपने घर पर Weekly Off का लुत्फ ले रहा था, जब M रामचंद्रन की joining की खबर कार्मिक विभाग के एक बड़े अफसर ने फोन पर दी। मैं उनको जानता था। वह गढ़वाल मण्डल के आयुक्त रह चुके थे। यहाँ से तबादले पर शासन में उच्च शिक्षा के सचिव बन के लखनऊ गए तो फिर मिले थे। मसूरी रोड स्थित Pestle Wood स्कूल (Unison स्कूल से कुछ पहले) में। वहाँ कोई सालाना समारोह था। रामचंद्रन Chief Guest थे। दुर्योग की बात है कि उस आयोजन के बाद ही स्कूल की ही छात्रा के साथ दुर्व्यवहार में स्कूल के मालिक प्रेम कश्यप धर-दबोचे गए। बच्ची किसी वकील की बेटी थी। वकीलों ने तूफान ला दिया था। मैंने रामचंद्रन को फोन पर ये बात बताई और कहा कि शुक्र मनाएँ कि आप पर आंच नहीं आई कि ऐसे स्कूल में क्यों गए। वह केंद्र से प्रतिनियुक्ति खत्म कर नए आवंटित काडर उत्तराखंड में आए तो ND Tiwari मुख्यमंत्री थे।

रामचंद्रन खुद की मार्केटिंग करना और आदमियों को पहचानने की गज़ब की कुव्वत रखते थे। किसको कैसे साधना है, ये भी उनसे बेहतर शायद ही कोई जानता था। उनकी शुरुआत युवा कल्याण महकमे के प्रमुख सचिव से हुई थी। जल्द ही उन्होंने NDT पर अपना जादू कायम कर लिया। साथ ही उनके OSD दरबारियों, जो किसी भी सचिव-प्रमुख सचिवों से अधिक रुतबा रखा करते थे, को अपने विश्वास में ले लिया। फिर जल्दी ही उनको बड़े महकमे मिलने लगे। फिर एक दिन मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव भी बन गए। तब तक उनका दबदबा असंदिग्ध रूप से नौकरशाही पर कायम हो चुका था।