Editor : Anamika Mishra
CM पुष्कर सिंह धामी ने अपनी दूसरी पारी (PSD-2.O सरकार) में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का संकल्प जाहिर किया है। आज ही भ्रष्टाचार मुक्त App भी लांच किया। उनको सबसे पहले कोढ़ बन चुके सिस्टम को सुधारना होगा। ऐसे इजीनियरों-अफसरों पर लगाम लगानी होगी, जो माल-पानी के फेर में उगाही और उत्पीड़न पर उतर आए हैं।
करीब से जाने वालों का कहना है कि अपनी दूसरी पारी में पुष्कर बेहद सख्त नजर आ रहे। नौकरशाहों के साथ उनका रुख पहले से कहीं बदला हुआ है। जिनको पहले खासमखास और भरोसेमंद माना जाता था, उनको भी अब वे अग्नि परीक्षा से गुजारे बिना शायद ही स्वीकार करेंगे। चंद सचिवों से ही पुष्कर प्रसन्न या संतुष्ट दिखते हैं। सचिवालय में होने वाली शासन के आला अफसरों की बैठक जितनी भी अभी तक हुई हैं, सभी में बदले हुए PSD ने मौजूद अफसरों और अन्य को भौंचक्का किया हुआ है। तनाव दे डाला है।
बैठक में CM अफसरों को बाकायदा ताकीद और सतर्क कर रहे हैं। वह अल्टिमेटम दे रहे हैं कि ये 5 महीने वाली नहीं 5 साल वाली सरकार है। जाहिर है कि भालू का काटा कंबल देख के भी सतर्क हो जाता है। ये बात अब छिपी नहीं रह गई है कि विधानसभा चुनाव के दौरान IAS-IPS अफसरों में से किसकी क्या भूमिका रही थी। कुछ नामों को ले के मुख्यमंत्री खास तौर पर बेहद नाखुश से अधिक खफा हैं। नौकरशाही में जो भी तबादले किसी भी वक्त हो सकते हैं, उससे पता चल जाएगा कि किसको ले के मुख्यमंत्री के मन में क्या भाव हैं।
अपने उपचुनाव में पुष्कर साफ-सुथरी और नौकरशाहों की मुश्कें बांध देने वाले मुख्यमंत्री के तौर पर उतरना चाहेंगे। न खाऊँगा न खाने दूँगा वाले मोदी के नारे को वह आत्मसात करने की कोशिश करते दिख रहे हैं। हर काम नियमों से कराने और CMO में जिस सचिव के पास जो काम है, उससे ही वह काम लेने का फरमान है। अब सेटिंग के जरिये किसी से भी कोई फाइल कराने का दौर खत्म सा दिख रहा है। छोटे या मँझोले तो छोड़ दें, सचिव और उससे बड़े अफसर तक की हिम्मत नहीं दिख रही कि वे बिना किसी Appointment के CM से मिल सकें।
PSD-1.O में इन नौकरशाहों का दबदबा और सिक्का था। इस सरकार में वे सभी दबाव में दिख रहे। उनके माथे पर चिंता की लकीरें झलक रही हैं। ऐसा लग रहा है कि पुष्कर अमित शाह-योगी आदित्यनाथ सरीखी कड़क छवि और प्रतिष्ठा अर्जित करने की राह अपना रहे हैं। पहले उनको जो लोग गंभीरता से नहीं ले रहे थे, उनको अब सीएम के सामने साँप सूंघा और हिचका देखा जा रहा है। अपना निजी स्टाफ भी मुख्यमंत्री अब बहुत सोच समझ के रखने की दिशा में हैं। संघ से जो नाम PRO-OSD के लिए आ भी रहे हैं, उनका भी खुफिया ढंग से सत्यापन का दौर चल रहा है कि कहीं वे CMO और CM की प्रतिष्ठा अपनी हरकतों से खराब न कर दें।