मंत्रियों के महकमों का बंटवारा करने से पहले CM पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर आला कमान की मुहर अपनी पसंद और राय पर लगवाई। PM नरेंद्र मोदी-गृह मंत्री अमित शाह-पार्टी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और संघ से जब हरी झंडी मिली, तब आधी रात को गोपन विभाग ने मुख्य सचिव के दस्तखत से कल मंत्रालयों की सूची जारी की। कामकाज बांटने में भी देर मंजूरी लेने के फेर में ही हुई। ये बात दीगर है कि हुआ वही जो पुष्कर ने चाहा। बात चाहे मंत्रिमंडल के गठन की रही हो या फिर मंत्रालयों के बँटवारे की। दबाव से दूर पुष्कर बिना आला कमान के Top Bosses से मंजूरी लिए एक भी कदम नहीं चल रहे। उनका अगला शॉट अब नौकरशाही में जबर्दस्त फेरबदल के तौर पर दिखने वाला है।

पुष्कर ने मंत्रालयों के बँटवारे में किसी किस्म की नाराजगी या असंतोष के सुर या फिर पार्टी के भीतर से ही अंगुली न उठने देने का भरपूर बंदोबस्त आला कमान (खास तौर पर मोदी-शाह-नड्डा-संघ) को भरोसे में ले के और उनकी `लाख लगी सील’ लगवा के कर दिया है। आबकारी-खनन-ऊर्जा-सूचना-राजस्व-पेयजल-पेयजल-कार्मिक-नागरिक उड्डयन और गृह बहुत वजनी महकमे हैं। उनके समेत 23 विभाग मुख्यमंत्री ने अपने पास ही रखे। साफ दिख रहा की उनकी ज्यादा से ज्यादा कोशिश मंत्रालयों के बँटवारे में भविष्य में किसी भी अहम महकमे में घोटालों और घपलों को काबू में करने की है।
ऊर्जा-खनन-आबकारी घोटालों और विवादों का केंद्र रहते रहे हैं। इसको सीधे उन्होंने अपने नियंत्रण में रख लिया। फिर भी ये कहा जा सकता है कि 8 में से कुछ मंत्रियों को भरपूर मलाईदार महकमे दिए गए। सतपाल और पहली बार स्पीकर से मंत्री बने प्रेमचंद अग्रवाल की मानो लॉटरी ही लग गई। सुबोध उनियाल-सौरभ बहुगुणा के पास अलबत्ता कम अहम महकमे आए। सतपाल के हिस्से PWD-पंचायती राज-सिंचाई-पर्यटन समेत 10 महकमे आए। प्रेमचंद के पास वित्त,आवास,शहरी विकास, टैक्स-विधायी-संसदीय कार्य आ गए। उनको 6 महकमे ही दिए गए लेकिन एक से एक मलाईदार व अहम।