अपने साथ सिर्फ 8 मंत्रियों को शपथ दिला के CM पुष्कर सिंह धामी ने 3 कुर्सियाँ मंत्रिमंडल में खाली छोड़ने का फैसला कर दावेदारों को खुद के प्रति वफादार रखने और सभी को काबू में रखने का फॉर्मूला अपनाया। बंशीधर भगत, बिशन सिंह चुफाल और अरविंद पांडे की छुट्टी कर अपनी ताकत तथा मोदी-शाह का खुद पर मजबूत भरोसे का प्रदर्शन भी किया। शपथ ग्रहण समारोह में PM नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के साथ ही देश के सभी दिग्गज पार्टी नेता,मुख्यमंत्रियों और संतों का जबर्दस्त जमावड़ा दिखा। कल शायद मंत्रियों के महकमे बाँट दिए जाएंगे।

पुष्कर ने 8 महीने पहले खुद के साथ मंत्री बने गणेश जोशी को तो साथ लिया लेकिन पिछली सरकार में मंत्री बिशन सिंह चुफाल,बंशीधर भगत व अरविंद पांडे सरीखे दिग्गजों को निराश करते हुए उनको मंत्रिमंडल से बाहर ही रख छोड़ा। ऐसा तब किया गया जबकि 3 सीटें मंत्रिमंडल में अभी खाली हैं। इसकी संभावना न्यून कही जा सकती है कि इन बची सीटों पर पहले दौर के शपथ ग्रहण में छोड़े गए चेहरों को बिठाया जा सकता है

ये कहा जा सकता है कि शायद तीनों दिग्गजों की Cabinet Train छूट गई है। मुख्यमंत्री का ये बहुत दिलेरी का फैसला कहा जा सकता है। चुफाल और भगत प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। कई बार मंत्री भी रहे। पुष्कर खुद दोनों की छत्र छाया में बीजेपी की सियासत कर चुके हैं। एक संभावना ये है कि चुफाल शायद राज्यसभा भेजे जाएँ और उनकी खाली की गई सीट पर डीडीहाट से पुष्कर उप चुनाव लड़ें। उन्होंने अरविंद को भी उनकी संघ में पकड़ के बावजूद कैबिनेट के भीतर आने नहीं दिया। ये उनके आत्मविश्वास और आला कमान की ताकत साथ होने की तरफ ईशारा जतलाता है।

महाराष्ट्र के राज्यपाल और उत्तराखंड के पूर्व CM भगत सिंह कोश्यारी के नजदीकी समझे जाने वाले चन्दन रामदास और पिछली सरकारों में भी मंत्री रेखा आर्य मंत्रिमंडल में जगह बनाने में सफल रहीं। खुद पुष्कर भी कोश्यारी के निकटस्थों में शुमार किए जाते हैं। सौरभ बहुगुणा सिर्फ पिता विजय बहुगुणा की वजह से मंत्री बन सके। एक बारगी के लिए सतपाल महाराज और गणेश जोशी के लिए भी खतरे की घंटी बजती दिख रही थी। धन सिंह की कुर्सी अलबत्ता, उनकी हाई कमान में मजबूत पकड़ के चलते सुरक्षित दिख रही थी।