श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति और सहायक परीक्षा नियंत्रक के बीच का लंबे समय से चला आ रहा शीत युद्ध और टकराव अब गृह युद्ध की शक्ल लेता जा रहा। दोनों के बीच के मतभेद और लड़ाई के चलते Affiliation University फिर सुर्खियों में है। प्रोन्नति के लिए उच्च न्यायालय गए सहायक परीक्षा नियंत्रक हेमंत बिष्ट के खिलाफ कुलपति पीताम्बर ध्यानी ने जांच बिठा के इस आरोप को भी हवा दे दी कि वह अदालत जाने के चलते उत्पीड़नात्मक कार्रवाई को अंजाम दे रहे और अदालत की अवमानना कर रहे हैं।
जो कार्मिक उत्पीड़न के मामले में अदालत गया हो, उसके खिलाफ जांच बिठा दिए जाने को दबाव डालने की कोशिश करार दिया जा रहा है। `Newsspace’ ने संपर्क किया तो हेमंत ने सिर्फ इतना कहा कि उनको विवि के हित में सच बोलने और अदालत जाने की सजा दी जा रही। इस कोशिश में अदालत की भी अवमानना का ख्याल नहीं रखा जा रहा। अभी मामला अदालत में है। ऐसे में कुछ कहना ठीक नहीं होगा। उनको जो भी कहना होगा, वहीं और उचित प्लेटफार्म पर कहेंगे।
कुलपति पीताम्बर खुद भी पिछले एक साल से लगातार कई किस्म के विवादों और आरोपों का सामना कर रहे हैं। उन पर एलडीसी को सीधे 66 सौ ग्रेड पे में रखने और प्राइवेट कॉलेजों में फर्जी प्रवेश के मामले में घनघोर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप हैं। ये भी आरोप हैं कि वह कुलपति बनने के लिए अर्ह नहीं थे, लेकिन बन गए। इस मामले में खुद उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
अहम पहलू ये है कि हेमंत पर ये आरोप और जांच तब अस्तित्व में आए, जब वह उच्च न्यायालय के सम्मुख ये गुहार ले के गए कि उनकी परीक्षा नियंत्रक पद पर डीपीसी नहीं की जा रही। मानक पूरे होने के बावजूद उनकी प्रोन्नति को टाला जा रहा। अदालत ने उनकी रिट याचिका पर संज्ञान लेते हुए सरकार और विवि प्रशासन को नोटिस जारी किया हुआ है। विवि प्रशासन का ये रवैया इसलिए भी हैरतनाक है कि सरकार की नीति और आदेश शीशे की तरह साफ हैं। जो भी प्रोन्नति के दायरे में हैं, उनको प्रोन्नत कर दिया जाए। लटकाया न जाए।
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