महाकुंभ मेले के लिए आए देशभर के संन्यासियों का धूना 24 घंटे चेतन रहता है। धूनी में हर समय अग्नि प्रज्ज्वलित होने से संन्यासी सुबह तीन बजे से उठकर रात 12 बजे तक तप और ध्यान में मगन रहते हैं। इस अवधि में वह महज पांच घंटे ही आराम करते हैं। इतना कठोर होता है संन्यासियों का जीवन।
अपनी पुरानी परंपरा के अनुसार देशभर से आए संन्यासियों की निरंजनी अखाड़ा में छावनी बनी हुई है। जिसमें संन्यासी अपने टेंट लगाकर रह रहे हैं। संन्यासियों की दिनचर्या सुबह तीन बजे से शुरू हो जाती है। वह सुबह तीन बजे उठकर गंगा स्नान आदि नित्यकर्म करने के बाद चार बजे से अपने ईष्ट देव की पूजा-पाठ करना शुरू कर देते हैं। छह बजे तक ईष्ट देव की आराधना की जाती है। इसके बाद संन्यासी अपना तप शुरू कर देते हैं।